नायर सर्विस सोसाइटी के आयोजन में लोकगीत, नृत्य और पुक्कलम ने बांधा समां; साध्या भोज बना खास आकर्षण
द्वारका, 30 अगस्त। केरल की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा का प्रमुख पर्व ओणम अब केवल राज्य की सीमाओं तक सीमित नहीं रह गया है। देश के अलग-अलग हिस्सों में रहने वाले लोग भी इस पर्व को उत्साह और सामूहिक भागीदारी के साथ मनाते हैं। द्वारका में नायर सर्विस सोसाइटी (NSS) की ओर से आयोजित ओणम समारोह ने इसी सांस्कृतिक समावेश और विविधता की सुंदर तस्वीर पेश की।
यद्यपि ओणम की जड़ें केरल की परंपरा में हैं, लेकिन समय के साथ यह पर्व विभिन्न समुदायों के बीच सांस्कृतिक संवाद और मेल-मिलाप का अवसर भी बन गया है। द्वारका में आयोजित समारोह में इसी भावना को प्रमुखता दी गई। 26 अगस्त को थिरुवोनम के अवसर के बाद 30 अगस्त को NSS सेंटर में कार्यक्रम का आयोजन बड़े उत्साह के साथ किया गया।

समारोह में केरल की पारंपरिक संस्कृति और लोक परंपराओं को प्रदर्शित करने वाले कई कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। लोकगीतों और आकर्षक नृत्यों ने समारोह में मौजूद लोगों का मनोरंजन किया। इसके अलावा फूलों से बनाई गई पारंपरिक पुक्कलम सजावट ने भी सभी का ध्यान आकर्षित किया।

ओणम समारोह का एक प्रमुख आकर्षण पारंपरिक ‘साध्या’ भोज रहा। केले के पत्तों पर परोसा जाने वाला यह पारंपरिक भोज ओणम की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। समारोह में इसकी मौजूदगी ने आयोजन को केरल की पारंपरिक जीवनशैली और खान-पान से भी जोड़ा।
आयोजन के दौरान मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित भी किया गया। विद्यार्थियों की उपलब्धियों को पहचान देने के साथ-साथ उन्हें प्रोत्साहित करने का यह प्रयास समारोह के सामाजिक पक्ष को दर्शाता है।
कार्यक्रम में NSS की केंद्रीय शाखा के प्रतिनिधियों के अलावा अन्य शाखाओं के सदस्य भी शामिल हुए। अलग-अलग शाखाओं और समुदायों के लोगों की भागीदारी ने समारोह को सामूहिक स्वरूप दिया। आयोजन में मौजूद लोगों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और कार्यक्रमों का आनंद लिया।
ओणम जैसे त्योहारों की खासियत यही है कि वे अपनी मूल संस्कृति को संरक्षित रखते हुए दूसरे समुदायों को भी उससे जुड़ने का अवसर देते हैं। द्वारका में आयोजित इस कार्यक्रम ने भी इसी विचार को मजबूत किया। यहां ओणम केवल एक धार्मिक या सांस्कृतिक पर्व के रूप में नहीं, बल्कि लोगों को जोड़ने वाले उत्सव के रूप में सामने आया।
आयोजकों की पहल ने यह संदेश दिया कि महानगरों में अलग-अलग राज्यों और समुदायों से आए लोगों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान समाज को और समृद्ध बनाता है। ऐसे आयोजन लोगों को अपनी परंपराओं से जोड़ने के साथ-साथ दूसरों की संस्कृति को समझने और उसका सम्मान करने का अवसर देते हैं।

लोकगीतों, नृत्य, पुक्कलम और साध्या के माध्यम से द्वारका में मनाया गया ओणम समारोह केरल की सांस्कृतिक विरासत की जीवंत झलक बन गया। साथ ही इसने यह भी साबित किया कि त्योहार भौगोलिक सीमाओं से परे जाकर समुदायों को जोड़ने और आपसी सद्भाव बढ़ाने का माध्यम बन सकते हैं।

