पश्चिम बंगाल को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन के नक्शे पर नई पहचान दिलाने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने नई ब्रांडिंग और विज्ञापन अभियान शुरू किया है। हालांकि, नया विज्ञापन जारी होते ही सोशल मीडिया पर विवादों में घिर गया। विज्ञापन में पश्चिम बंगाल के पर्यटन स्थलों के बजाय फ्रांस का एफिल टावर, रूस का सेंट बेसिल कैथेड्रल, मिस्र के पिरामिड और ब्राजील के रियो डी जेनेरियो का क्राइस्ट द रिडीमर जैसे विदेशी स्थलों की झलक दिखाई गई है।
सोशल मीडिया यूजर्स ने इसी बात को लेकर विज्ञापन पर सवाल उठाए हैं। लोगों का कहना है कि पश्चिम बंगाल की खूबसूरती दिखाने के लिए बनाए गए विज्ञापन में बंगाल से ज्यादा दुनिया के दूसरे देशों के पर्यटन स्थल नजर आ रहे हैं। विज्ञापन की शुरुआत हावड़ा ब्रिज के दृश्यों से होती है, लेकिन इसके बाद बंगाल की झलक बेहद कम दिखाई देती है। यही वजह है कि कई यूजर्स ने सवाल उठाया कि आखिर पश्चिम बंगाल टूरिज्म के विज्ञापन में पश्चिम बंगाल है कहां?
राज्य सरकार की ओर से नई पर्यटन ब्रांडिंग के तहत 'West Bengal: Where India feels different' टैगलाइन पेश की गई है। इसके साथ ही पर्यटन विभाग की नई पहचान और लोगो भी लॉन्च किया गया। कार्यक्रम में पर्यटन के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए 500 करोड़ रुपये खर्च करने की घोषणा भी की गई।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि राज्य के पर्यटन ढांचे को नुकसान पहुंचा है और इसे बेहतर बनाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि दार्जिलिंग और कालिम्पोंग आने वाले कई पर्यटक आगे सिक्किम चले जाते हैं। सरकार का लक्ष्य इस स्थिति को बदलना और पश्चिम बंगाल को खुद एक प्रमुख पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित करना है।

विवाद की सबसे बड़ी वजह विज्ञापन में बंगाल के प्रमुख पर्यटन स्थलों को पर्याप्त जगह नहीं मिलना है। सोशल मीडिया पर यूजर्स ने सवाल किया कि जब राज्य के पास विक्टोरिया मेमोरियल, बिष्णुपुर के टेराकोटा मंदिर, दार्जिलिंग की टॉय ट्रेन, सुंदरबन के मैंग्रोव जंगल, समुद्र तटों और हिमालयी इलाकों जैसी इतनी विविध पर्यटन संपदा मौजूद है, तो विदेशी स्थलों को विज्ञापन में प्रमुखता देने की जरूरत क्यों पड़ी।

विज्ञापन को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। TMC सांसद डेरेक ओ'ब्रायन ने इसकी आलोचना करते हुए इसे बेहद खराब कम्युनिकेशन बताया। त्रिपुरा और मेघालय के पूर्व राज्यपाल तथागत रॉय ने भी वीडियो पर सवाल उठाते हुए इसे गैर-पेशेवर बताया और पूछा कि पश्चिम बंगाल के पर्यटन विज्ञापन में मॉस्को, मिस्र और रियो डी जेनेरियो के दृश्य क्यों शामिल किए गए हैं।
राजनीतिक विश्लेषक मयूख रंजन घोष ने भी विज्ञापन पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि जब पश्चिम बंगाल में पहाड़, समुद्र, जंगल और ऐतिहासिक शहरों से लेकर सांस्कृतिक विरासत तक सबकुछ मौजूद है, तो दुनिया के दूसरे हिस्सों के प्रसिद्ध स्थलों को दिखाने का क्या औचित्य है।
नई टैगलाइन को लेकर भी सोशल मीडिया पर चर्चा तेज है। कुछ यूजर्स इसकी तुलना दूसरे राज्यों की लोकप्रिय पर्यटन टैगलाइन से कर रहे हैं। ऐसे में नई ब्रांडिंग का उद्देश्य भले ही पश्चिम बंगाल को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर मजबूती से स्थापित करना हो, लेकिन विज्ञापन की क्रिएटिव प्रस्तुति ने फिलहाल पर्यटन से ज्यादा बहस और राजनीतिक विवाद को जन्म दे दिया है।

