छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित झीरम घाटी नक्सली हमले के मामले में 13 साल बाद अदालत का बड़ा फैसला आया है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की विशेष अदालत ने शनिवार को ट्रायल का सामना कर रहे सभी 10 आरोपियों को दोषी करार दिया। 2013 में हुए इस हमले में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं समेत 29 लोगों की जान गई थी, जबकि 30 से अधिक लोग घायल हुए थे। अदालत अब दोषियों की सजा पर 16 सितंबर को फैसला सुनाएगी।
NIA मामलों के विशेष न्यायाधीश अजय सिंह राजपूत ने सभी 10 आरोपियों को दोषी ठहराया। बचाव पक्ष के अधिवक्ता अरविंद चौधरी के अनुसार, मामले में शुरुआत में 11 आरोपियों के खिलाफ सुनवाई चल रही थी, लेकिन इनमें से एक की बाद में मौत हो गई। दोषी ठहराए गए आरोपियों में दो महिलाएं भी शामिल हैं। मुकदमे की सुनवाई के दौरान अदालत ने कुल 101 गवाहों के बयान दर्ज किए।
दोषी करार दिए गए आरोपियों में प्रमिला मोडियाम, चैतू लेकाम, सुमित्रा पुनेम मोडियाम, मुक्का मंडावी, कोसा कवासी, आयता मरकाम, मड़कामी देवा, जोगा मड़कामी, बंजामी सन्ना और महादेव नाग शामिल हैं।
फैसले के बाद बचाव पक्ष ने हाई कोर्ट का रुख करने की बात कही है। अधिवक्ता अरविंद चौधरी ने कहा कि अभी अदालत के फैसले की प्रति उन्हें प्राप्त नहीं हुई है। आदेश की कॉपी मिलने के बाद ही अपील के आधार तय किए जाएंगे। वहीं दोषी कोसा कवासी के भाई गुड्डू कवासी ने दावा किया कि कोसा और मुक्का मंडावी को मामले में गलत तरीके से फंसाया गया है। उनके मुताबिक, हमले के समय दोनों अपने गांव में शादी की तैयारियों में व्यस्त थे।

25 मई 2013 को छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने 'परिवर्तन यात्रा' निकाली थी। इसी दौरान बस्तर की झीरम घाटी से गुजर रहे कांग्रेस नेताओं के काफिले पर नक्सलियों ने घात लगाकर हमला कर दिया। हमले में कांग्रेस नेताओं, सुरक्षाकर्मियों और आम नागरिकों समेत 29 लोगों की मौत हुई थी और 30 से अधिक लोग घायल हुए थे।

हमले में तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंद कुमार पटेल और उनके बेटे दिनेश पटेल, पूर्व नेता प्रतिपक्ष महेंद्र कर्मा तथा वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व विधायक उदय मुदलियार समेत कई प्रमुख नेताओं की जान गई थी। पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल भी हमले में गंभीर रूप से घायल हुए थे और बाद में उनका निधन हो गया था। इस हमले को छत्तीसगढ़ के राजनीतिक इतिहास की सबसे भयावह घटनाओं में गिना जाता है और इससे राज्य कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को भारी नुकसान हुआ था।
हमले के दो दिन बाद तत्कालीन रमन सिंह सरकार ने मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी को सौंप दी थी। साथ ही, राज्य सरकार ने तत्कालीन छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के न्यायाधीश प्रशांत कुमार मिश्रा की अध्यक्षता में एक न्यायिक आयोग का भी गठन किया था।
NIA ने 25 सितंबर 2014 को जगदलपुर की विशेष अदालत में गिरफ्तार नौ आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। इसके बाद 28 सितंबर 2015 को 30 आरोपियों के खिलाफ सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की गई। इनमें से दो आरोपियों को बाद में गिरफ्तार किया गया।
छत्तीसगढ़ में 2018 में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने जनवरी 2019 में मामले की जांच के लिए SIT गठित की। कांग्रेस की ओर से लगातार आरोप लगाया गया कि NIA की जांच में हमले के पीछे की कथित बड़ी साजिश के पहलू को पूरी तरह सामने नहीं लाया गया।

इसके बाद 25 मई 2020 को मारे गए कांग्रेस नेता उदय मुदलियार के बेटे जितेंद्र मुदलियार की शिकायत पर दरभा थाने में हत्या और आपराधिक साजिश के आरोपों में एक नई FIR दर्ज की गई। NIA ने इस जांच को भी अपने हाथ में लेने की मांग की थी। विशेष अदालत से राहत नहीं मिलने के बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, लेकिन शीर्ष अदालत ने भी इस मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।
अब 13 साल बाद आए अदालत के फैसले के बाद मामले की अगली अहम तारीख 16 सितंबर है, जब दोषियों की सजा पर अदालत अपना निर्णय सुनाएगी।

