‘पंचायत आजतक’ के सेशन ‘मेरे तो गिरिधर गोपाल’ में कथावाचक अनिरुद्धाचार्य जी महाराज ने कर्म, मुफ्त की राजनीति, प्रेम संबंध, शादी और रिश्तों में बढ़ती हिंसा जैसे मुद्दों पर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए मेहनत और संघर्ष जरूरी है। हर सुविधा मुफ्त में मिलने की आदत व्यक्ति को आत्मनिर्भर बनने से रोक सकती है।
अनिरुद्धाचार्य ने बच्चों का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह बच्चा गिरकर और उठकर चलना सीखता है, उसी तरह इंसान को भी जीवन में संघर्ष करने का मौका मिलना चाहिए। उन्होंने युवाओं को पढ़ाई और करियर पर ध्यान देने की सलाह दी और कहा कि रिश्तों में पड़ने से पहले यह समझना जरूरी है कि सामने वाला वास्तव में प्रेम करता है या किसी स्वार्थ से जुड़ा है।
शादी और रिश्तों को लेकर उन्होंने कहा कि पति-पत्नी के बीच बाहरी हस्तक्षेप उचित नहीं है और वह तलाक कराने के पक्ष में नहीं हैं। उन्होंने युवाओं से रिश्तों को लेकर गंभीर और जिम्मेदार रहने के साथ माता-पिता की उम्मीदों को भी समझने की अपील की।
रिश्तों से जुड़े मामलों में बढ़ती हिंसा पर अनिरुद्धाचार्य ने कहा कि समस्या का समाधान हिंसा नहीं हो सकता। उनके मुताबिक बेटों और बेटियों दोनों को सम्मान और जिम्मेदारी के संस्कार देना जरूरी है। उन्होंने कहा कि समाज तभी संतुलित रहेगा, जब पुरुष और महिला दोनों एक-दूसरे के अधिकार और सम्मान को समझेंगे।
सोशल मीडिया पर उन्होंने सकारात्मक रुख अपनाते हुए कहा कि इसने लोगों को अपनी बात रखने का मंच दिया है। वहीं धार्मिक ग्रंथों को लेकर उन्होंने कहा कि किसी भी बात को समझे बिना खारिज करने के बजाय पहले उसका अध्ययन और सही संदर्भ समझना चाहिए। उनका संदेश था कि जो अच्छा लगे उसे अपनाएं और जो उचित न लगे उसे छोड़ दें।




