बढ़ता तापमान बुजुर्गों के लिए बना बड़ा खतरा, 3°C ग्लोबल वार्मिंग पर भारत में 80% से ज्यादा बुजुर्ग झेल सकते हैं खतरनाक गर्मी

Lifestyle August 20, 2026 By Bharat Bhushan Malviya
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दुनिया में बढ़ता तापमान अब सिर्फ पर्यावरण की चिंता नहीं रह गया है, बल्कि यह लोगों की सेहत के लिए भी बड़ा खतरा बनता जा रहा है। खासकर बुजुर्गों पर इसका असर अधिक गंभीर हो सकता है। द लैंसेट प्लैनेटरी हेल्थ में प्रकाशित एक नई स्टडी ने ग्लोबल वार्मिंग के बढ़ते प्रभावों को लेकर चिंता जताई है।

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रिसर्च के मुताबिक, अगर वैश्विक औसत तापमान औद्योगिक दौर से पहले के स्तर की तुलना में 3°C या उससे अधिक बढ़ता है, तो भारत समेत दक्षिण एशिया के करोड़ों बुजुर्गों को साल के कई महीनों तक दिन और रात दोनों समय खतरनाक गर्मी का सामना करना पड़ सकता है।

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3°C तापमान बढ़ने पर 80% से ज्यादा बुजुर्गों पर खतरा

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स्टडी के अनुसार भारत, चीन, पाकिस्तान और बांग्लादेश में रहने वाले बुजुर्गों को 3°C ग्लोबल वार्मिंग की स्थिति में साल के करीब तीन महीने तक दिन-रात अत्यधिक गर्मी का सामना करना पड़ सकता है। इन चार देशों में दुनिया की लगभग 73 फीसदी बुजुर्ग आबादी रहती है।

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भारत के लिए स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक बताई गई है। रिसर्च के मुताबिक, तापमान में 3°C की वृद्धि होने पर देश की 80 फीसदी से ज्यादा बुजुर्ग आबादी को हर साल कम से कम 180 घंटे ऐसी गर्मी का सामना करना पड़ सकता है, जिसे शरीर के लिए बेहद कठिन माना जाता है।

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दिल्ली और इंडो-गंगेटिक प्लेन सबसे ज्यादा संवेदनशील

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रिसर्च में दिल्ली और बड़े इंडो-गंगेटिक प्लेन को विशेष रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में शामिल किया गया है।

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स्टडी के अनुसार, केवल 1.5°C ग्लोबल वार्मिंग की स्थिति में भी इन क्षेत्रों के बुजुर्गों को सालाना करीब 1,000 या उससे अधिक घंटे अत्यधिक गर्मी का सामना करना पड़ सकता है। यह तापमान स्तर लगभग 2030 के आसपास पहुंचने की आशंका जताई गई है।

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अगर ग्लोबल वार्मिंग 3°C तक पहुंचती है, तो ऐसी गर्मी का समय 2,000 घंटे से अधिक हो सकता है। इसका अधिकांश प्रभाव मई से सितंबर के बीच देखने को मिल सकता है।

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कई महीनों तक दिन और रात दोनों समय गर्मी

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स्टडी की प्रमुख लेखिका प्रोफेसर किंगकिंग कोंग के मुताबिक, तापमान में 3°C से अधिक वृद्धि होने पर बुजुर्गों को लगातार कई महीनों तक दिन और रात दोनों समय अत्यधिक गर्मी झेलनी पड़ सकती है।

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ऐसी स्थिति में केवल लोगों की सेहत ही प्रभावित नहीं होगी, बल्कि बिजली, कूलिंग सिस्टम, अस्पतालों और हीट-रिस्पॉन्स प्रोग्राम पर भी भारी दबाव पड़ सकता है।

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बुजुर्गों के लिए कम तापमान पर भी ज्यादा खतरा

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उम्र बढ़ने के साथ शरीर की गर्मी को नियंत्रित करने की क्षमता कम हो जाती है। बुजुर्गों में पसीना आने की क्षमता कम हो सकती है, रक्त वाहिकाओं की प्रतिक्रिया धीमी हो सकती है और गर्म वातावरण में दिल पर अधिक दबाव पड़ सकता है।

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इसी वजह से जो तापमान किसी युवा व्यक्ति के लिए सहनीय हो सकता है, वही किसी बुजुर्ग के लिए स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकता है।

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रिसर्च में अलग-अलग आयु वर्गों की गर्मी सहने की क्षमता का अध्ययन किया गया और तापमान के अलग-अलग स्तरों पर संभावित जोखिम का आकलन किया गया।

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दक्षिण एशिया को सबसे संवेदनशील क्षेत्रों में रखा गया

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स्टडी में भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश समेत दक्षिण एशिया के कई देशों को बढ़ती गर्मी के प्रति अत्यधिक संवेदनशील बताया गया है। बड़ी आबादी, गर्म जलवायु और आर्थिक कमजोरियां लोगों की गर्मी से बचने की क्षमता को प्रभावित कर सकती हैं।

विशेषज्ञों के मुताबिक, बुजुर्गों में बढ़ता हीट स्ट्रेस एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बन सकता है। इसलिए भविष्य की हीट-हेल्थ रणनीतियों में केवल तापमान ही नहीं, बल्कि नमी, गर्मी के संपर्क की अवधि, रात का तापमान और व्यक्ति की उम्र जैसे कारकों को भी ध्यान में रखना जरूरी होगा।

क्या है सबसे बड़ी चिंता?

बढ़ती गर्मी का खतरा सिर्फ दिन के समय तक सीमित नहीं है। अगर रात में भी तापमान कम नहीं होता, तो शरीर को आराम और खुद को ठंडा करने का पर्याप्त मौका नहीं मिलता। बुजुर्गों के लिए लंबे समय तक ऐसी स्थिति में रहना विशेष रूप से जोखिम भरा हो सकता है।

ऐसे में बढ़ते तापमान के बीच बुजुर्गों के लिए पर्याप्त पानी, ठंडा वातावरण, बिजली की उपलब्धता, समय पर चिकित्सा सहायता और स्थानीय हीट-एक्शन प्लान बेहद महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

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