देशभर में बढ़ती गर्मी और हीटवेव के बीच अब लोगों के घर भी राहत देने की बजाय “हीट ट्रैप” बनते जा रहे हैं। हाल ही में सामने आई एक स्टडी में खुलासा हुआ है कि भारत के कई शहरों में घरों के अंदर रात के समय भी तापमान 35 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि कंक्रीट की इमारतें, खराब वेंटिलेशन और बढ़ती शहरी गर्मी लोगों की सेहत के लिए बड़ा खतरा बन रही है।

रिपोर्ट के अनुसार, चेन्नई में अक्टूबर 2025 से अप्रैल 2026 के बीच 50 लो और मिडिल इनकम वाले घरों में सेंसर के जरिए तापमान रिकॉर्ड किया गया। अध्ययन में पाया गया कि घरों के अंदर रात के समय भी तापमान 31 डिग्री सेल्सियस से नीचे नहीं गया, जबकि कई बार यह 34 से 35 डिग्री तक पहुंच गया। सबसे ज्यादा गर्मी रात 8 से 9 बजे के बीच दर्ज की गई।
विशेषज्ञों के मुताबिक, दिनभर धूप और गर्मी सोखने वाली कंक्रीट की दीवारें और फर्श रात में धीरे-धीरे वही गर्मी छोड़ते हैं। इसी कारण घर देर रात तक गर्म बने रहते हैं। इसके साथ ही ज्यादा नमी और खराब हवा निकासी की वजह से लोगों को राहत नहीं मिल पाती। डॉक्टरों का कहना है कि लगातार बनी रहने वाली गर्मी शरीर को रिकवर होने का मौका नहीं देती और इससे हीट स्ट्रेस, थकान, नींद की कमी और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है।
विशेषज्ञों ने बिना एसी कमरे को ठंडा रखने के लिए कुछ आसान उपाय भी बताए हैं। दिन के समय खिड़कियों और पर्दों को बंद रखने, रात में वेंटिलेशन बढ़ाने, सफेद या हल्के रंग के पर्दे इस्तेमाल करने और छत पर रिफ्लेक्टिव कोटिंग लगाने से घर का तापमान कम किया जा सकता है। इसके अलावा खस की टट्टी, मिट्टी के घड़े, पौधे और प्राकृतिक वेंटिलेशन जैसे पारंपरिक भारतीय तरीके भी काफी असरदार माने जा रहे हैं।
जलवायु विशेषज्ञों का कहना है कि तेजी से बढ़ता शहरीकरण, कंक्रीट का बढ़ता इस्तेमाल और हरियाली की कमी शहरों को “अर्बन हीट आइलैंड” में बदल रही है। आने वाले वर्षों में यदि शहरी योजनाओं और भवन निर्माण में बदलाव नहीं किए गए, तो रात की गर्मी लोगों के लिए और बड़ा संकट बन सकती है।


