अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार दूसरे दिन बड़ी गिरावट देखने को मिली है। अमेरिका और ईरान के बीच संभावित कूटनीतिक बातचीत और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर किसी समझौते की उम्मीद बढ़ने से तेल बाजार में बना जियोपॉलिटिकल प्रीमियम तेजी से कम हुआ है। 3 अगस्त को ब्रेंट क्रूड करीब 5 से 7 फीसदी तक टूटकर 83 डॉलर प्रति बैरल से नीचे चला गया था, जबकि 4 अगस्त को इसकी कीमत करीब 79-80 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गई।
ईरान के साथ बातचीत से बदली बाजार की धारणा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ईरान के साथ बातचीत और सैन्य कार्रवाई को लेकर नरम संकेतों के बाद निवेशकों में तनाव कम होने की उम्मीद जगी है। हालांकि, बातचीत की स्थिति को लेकर अमेरिका और ईरान के बयानों में अंतर बना हुआ है। अमेरिका की ओर से बातचीत में प्रगति के संकेत दिए जा रहे हैं, जबकि तेहरान ने अमेरिकी दावों पर अलग रुख अपनाया है। इसी बीच ईरान और ओमान के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सुरक्षित समुद्री आवाजाही को लेकर बातचीत जारी रहने की जानकारी सामने आई है।

होर्मुज का मुद्दा इस पूरे घटनाक्रम में बेहद महत्वपूर्ण है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अहम है और यहां लंबे समय तक किसी तरह की रुकावट से कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आ सकता है। इसके उलट, अगर सुरक्षित नौवहन और आपूर्ति को लेकर भरोसा बढ़ता है तो तेल की कीमतों पर दबाव बना रह सकता है।

ब्रेंट 80 डॉलर के करीब
3 अगस्त को ब्रेंट क्रूड करीब 6 फीसदी तक गिरकर तीन सप्ताह के निचले स्तर पर पहुंच गया था। इसके बाद 4 अगस्त को भी गिरावट जारी रही और ब्रेंट करीब 79-80 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक आ गया। यानी मूल खबर में बताए गए 83 डॉलर के आसपास का स्तर अब ताजा कीमत नहीं है।
कच्चे तेल की कीमतों में यह गिरावट केवल अमेरिका-ईरान बातचीत की वजह से नहीं है। बाजार में मध्य-पूर्व के तनाव से जुड़े जोखिम प्रीमियम में कमी के साथ-साथ वैश्विक तेल आपूर्ति और ओपेक+ से जुड़े संकेत भी कीमतों को प्रभावित कर रहे हैं।
भारतीय शेयर बाजार में भी दिखा असर, लेकिन तेजी कायम नहीं रही
सस्ता क्रूड भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सामान्य तौर पर सकारात्मक माना जाता है, क्योंकि भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। तेल की कीमतों में कमी से आयात बिल, महंगाई और चालू खाते पर दबाव कम होने की उम्मीद बनती है। इसी वजह से सोमवार को वैश्विक बाजारों में तेजी के बीच भारतीय बाजार में भी सकारात्मक माहौल बना था।

हालांकि, 4 अगस्त को घरेलू शेयर बाजार में शुरुआती मजबूती टिक नहीं सकी। दिन के कारोबार के बाद सेंसेक्स करीब 210 अंक गिर गया, जबकि निफ्टी 24,650 के नीचे बंद हुआ। बाजार में अब निवेशकों की नजर भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति बैठक और अमेरिका-ईरान घटनाक्रम पर बनी हुई है।
पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर क्या असर?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड सस्ता होने से भारत के लिए कच्चे तेल की खरीद लागत घटने की संभावना बनती है, लेकिन इसका सीधा मतलब यह नहीं है कि पेट्रोल और डीजल की कीमतें तुरंत कम हो जाएंगी। घरेलू ईंधन कीमतों पर अंतरराष्ट्रीय क्रूड के अलावा डॉलर-रुपया विनिमय दर, टैक्स, रिफाइनिंग मार्जिन और तेल विपणन कंपनियों की मूल्य निर्धारण नीति जैसे कई कारकों का असर पड़ता है।
फिलहाल सबसे बड़ा संकेत यह है कि मध्य-पूर्व में तनाव कम होने की उम्मीद से कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ा है। हालांकि अमेरिका-ईरान बातचीत की दिशा अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। अगर बातचीत आगे बढ़ती है और होर्मुज में सामान्य समुद्री आवाजाही बहाल होती है, तो तेल की कीमतों में और नरमी आ सकती है। इसके उलट तनाव फिर बढ़ा तो क्रूड में दोबारा तेज उछाल देखने को मिल सकता है।

