जंतर-मंतर पर CJP के प्रदर्शन के दौरान एक पुलिसकर्मी के मंच पर पहुंचकर अपना बैज उतारने और नौकरी छोड़ने का दावा करने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। खुद को उत्तराखंड पुलिस का कांस्टेबल शेर सिंह बताने वाले व्यक्ति ने कहा कि वह छात्रों के आंदोलन के समर्थन में अपनी सेवा छोड़ रहा है और अब जनता के साथ खड़ा रहेगा।
मंच से संबोधित करते हुए शेर सिंह ने कहा कि यदि अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना बगावत है, तो वह खुद को "बागी" मानते हैं। उन्होंने पुलिस बैज CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके को सौंपते हुए छात्रों के आंदोलन के प्रति समर्थन जताया। इस दौरान मौजूद लोगों ने उनका स्वागत किया और घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
उत्तराखंड पुलिस का दावा

हालांकि, उत्तराखंड पुलिस ने इस घटनाक्रम पर अलग तस्वीर पेश की है। पुलिस के अनुसार, शेर सिंह पहले से ही निलंबित थे और उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई चल रही थी। अधिकारियों का कहना है कि मंच से दिया गया कथित इस्तीफा कोई औपचारिक इस्तीफा नहीं माना जा सकता।
पुलिस ने यह भी बताया कि शेर सिंह के खिलाफ पहले से एक आपराधिक मामला दर्ज है और विभागीय जांच जारी है। अधिकारियों के मुताबिक, उनके हालिया बयान और मंच से दिए गए भाषण को लेकर भी कानूनी और विभागीय कार्रवाई की जा रही है।

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इसे लेकर व्यापक चर्चा शुरू हो गई। कुछ लोगों ने इसे छात्रों के आंदोलन के समर्थन का प्रतीक बताया, जबकि अन्य ने पुलिस के आधिकारिक बयान का हवाला देते हुए वायरल दावों पर सवाल उठाए। फिलहाल, मंच से किए गए इस्तीफे के दावे और उसकी वैधानिक स्थिति को लेकर दोनों पक्षों के अलग-अलग दावे सामने आए हैं।


