ब्रिटेन की राजनीति में इस समय बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिल रहा है। विवादों के बीच प्रधानमंत्री किएर स्टार्मर ने प्रधानमंत्री पद और लेबर पार्टी के नेता पद से इस्तीफा दे दिया है। उनके इस्तीफे के बाद देश के अगले प्रधानमंत्री को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं और ग्रेटर मैनचेस्टर के मेयर एंडी बर्नहैम सबसे मजबूत दावेदार के रूप में उभरकर सामने आए हैं।
हाल ही में हुए मेकरफील्ड उपचुनाव में एंडी बर्नहैम ने दक्षिणपंथी पार्टी ‘रिफॉर्म यूके’ को महत्वपूर्ण शिकस्त दिलाने में अहम भूमिका निभाई। इस जीत के बाद लेबर पार्टी के भीतर उनका कद और मजबूत हो गया है।
पत्रकारिता से राजनीति तक का सफर
एंडी बर्नहैम का राजनीतिक सफर काफी दिलचस्प रहा है। उन्होंने कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से अंग्रेजी साहित्य की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने पत्रकारिता के क्षेत्र में कदम रखा और विभिन्न पत्रिकाओं के लिए काम किया।
महज 20 वर्ष की आयु में वह लेबर पार्टी की वरिष्ठ सांसद टेसा जोवेल के शोध सहायक बने। यहीं से उनकी सक्रिय राजनीतिक यात्रा शुरू हुई।
2001 में बने सांसद
वर्ष 2001 में एंडी बर्नहैम पहली बार ग्रेटर मैनचेस्टर की लेई सीट से सांसद चुने गए। इसके बाद उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर और गॉर्डन ब्राउन की सरकारों में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं।

उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री और संस्कृति मंत्री सहित कई प्रमुख कैबिनेट पदों पर कार्य किया और प्रशासनिक अनुभव हासिल किया।
ग्रेटर मैनचेस्टर के पहले मेयर

साल 2017 में एंडी बर्नहैम ग्रेटर मैनचेस्टर के पहले निर्वाचित मेयर बने। इस पद पर रहते हुए उन्होंने स्थानीय विकास, परिवहन और सामाजिक मुद्दों पर विशेष ध्यान दिया।
कोविड-19 महामारी के दौरान उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन सरकार की कुछ नीतियों का खुलकर विरोध किया था। उनका कहना था कि उत्तरी इंग्लैंड के लोगों के साथ संसाधनों और आर्थिक सहायता के मामले में भेदभाव किया जा रहा है।
इसी दौरान उन्होंने क्षेत्रीय हितों की जोरदार पैरवी की और उन्हें "किंग ऑफ द नॉर्थ" के नाम से पहचान मिलने लगी।
दक्षिणपंथी चुनौती का किया मुकाबला
हाल के वर्षों में नाइजल फराज की पार्टी ‘रिफॉर्म यूके’ ने ब्रिटेन की राजनीति में तेजी से अपनी पकड़ मजबूत की है। प्रवासन, महंगाई और आर्थिक चुनौतियों को लेकर जनता के बीच बढ़ती नाराजगी का लाभ उठाकर पार्टी ने कई क्षेत्रों में समर्थन हासिल किया।

हालांकि मेकरफील्ड उपचुनाव में एंडी बर्नहैम ने स्थानीय मुद्दों को केंद्र में रखकर दक्षिणपंथी प्रभाव को चुनौती दी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनकी जमीनी पकड़ और आम लोगों से जुड़ाव ने लेबर पार्टी को महत्वपूर्ण बढ़त दिलाई।
आम लोगों के नेता की छवि

एंडी बर्नहैम को एक ऐसे नेता के रूप में देखा जाता है जो आम लोगों की समस्याओं को समझते हैं। औद्योगिक बदलावों से प्रभावित क्षेत्रों, श्रमिक वर्ग और मध्यम वर्ग के बीच उनकी लोकप्रियता काफी मजबूत मानी जाती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि उनकी यही जनसमर्थक छवि उन्हें प्रधानमंत्री पद की दौड़ में सबसे आगे खड़ा करती है।
आगे क्या?
कीएर स्टार्मर के इस्तीफे के बाद लेबर पार्टी जल्द ही नए नेता के चयन की प्रक्रिया शुरू कर सकती है। पार्टी के भीतर कई नामों पर चर्चा चल रही है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में एंडी बर्नहैम को सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा है।
यदि उन्हें पार्टी नेतृत्व मिलता है, तो वह ब्रिटेन के अगले प्रधानमंत्री बनने की दौड़ में सबसे आगे होंगे। अब पूरे देश की नजर लेबर पार्टी के अगले फैसले पर टिकी हुई है।