अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की घोषणा के बाद भी होर्मुज स्ट्रेट के आसपास हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं। ताजा घटनाक्रम में ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी Mehr ने बताया है कि होर्मुज स्ट्रेट के पास स्थित केशम द्वीप के दक्षिणी हिस्से में तीन जोरदार धमाकों की आवाजें सुनी गईं। इन धमाकों ने क्षेत्र में एक बार फिर तनाव बढ़ा दिया है।
प्रारंभिक रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये विस्फोट संभवतः समुद्री यातायात को नियंत्रित करने या मार्ग को सुरक्षित बनाने की प्रक्रिया का हिस्सा हो सकते हैं। हालांकि अभी तक ईरान की ओर से इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। स्थानीय लोगों ने सूजा और मासेन क्षेत्रों के पास इन धमाकों की आवाजें सुनने की बात कही है।
होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का बेहद अहम समुद्री मार्ग है, जहां से रोजाना दुनिया का करीब 20 प्रतिशत तेल और LNG गुजरता है। यही वजह है कि इस इलाके में किसी भी तरह की हलचल का असर सीधे अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर पड़ता है।

इसी बीच राहत की खबर यह है कि भारत की ओर आ रहा LNG जहाज दिशा सोमवार को सुरक्षित रूप से होर्मुज स्ट्रेट पार कर चुका है। इसके बाद करीब 34 भारतीय और विदेशी झंडे वाले जहाज भी सुरक्षित रास्ते के इंतजार में हैं। इससे उम्मीद बढ़ी है कि फारस की खाड़ी में फंसे जहाज अब धीरे-धीरे भारतीय बंदरगाहों तक पहुंच सकेंगे।

रिपोर्ट्स के अनुसार, इन जहाजों में 16 उर्वरक लेकर आ रहे हैं, जो भारत की कृषि जरूरतों के लिए अहम माने जा रहे हैं। इसके अलावा 15 जहाज कच्चा तेल, LNG और LPG लेकर आ रहे हैं, जबकि तीन अन्य सामान्य मालवाहक जहाज हैं।

भारत के लिए होर्मुज स्ट्रेट की अहमियत बेहद बड़ी है। देश अपनी कुल तेल जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, जिसमें पश्चिम एशिया की हिस्सेदारी प्रमुख है। इसके अलावा आयातित LNG और LPG का बड़ा भाग भी इसी रास्ते से आता है। खासकर LPG सप्लाई का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा इसी समुद्री मार्ग पर निर्भर है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका-ईरान समझौते के बाद अगर यह मार्ग पूरी तरह स्थिर और सुरक्षित हो जाता है, तो वैश्विक ऊर्जा बाजार में राहत मिल सकती है। इससे भारत जैसे आयातक देशों को भी तेल और गैस की कीमतों में राहत मिलने की संभावना बढ़ेगी। हालांकि हालिया धमाकों ने यह संकेत दिया है कि क्षेत्र में स्थिरता अभी पूरी तरह स्थापित नहीं हुई है।

