भारत की प्रमुख इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर कंपनी टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स कथित तौर पर एक बड़े साइबर हमले का शिकार हुई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, हैकर्स ने कंपनी के आईटी सिस्टम में सेंध लगाकर बड़ी मात्रा में गोपनीय डेटा चुरा लिया है और उसे सार्वजनिक न करने के बदले फिरौती की मांग की है।
बताया जा रहा है कि इस साइबर हमले में कंपनी की कई संवेदनशील फाइलें, आंतरिक दस्तावेज, कर्मचारियों की जानकारी और व्यावसायिक रिकॉर्ड प्रभावित हुए हैं। दावा किया जा रहा है कि चोरी किए गए डेटा में वैश्विक तकनीकी कंपनियों से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज भी शामिल हैं।
रैनसमवेयर हमले से डेटा हुआ लॉक

रिपोर्ट के अनुसार, हैकर्स ने टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के सिस्टम में रैनसमवेयर नामक मालवेयर का इस्तेमाल किया। रैनसमवेयर किसी संगठन की फाइलों और डेटा को एन्क्रिप्ट या लॉक कर देता है, जिसके बाद हैकर्स डेटा को अनलॉक करने या लीक न करने के बदले फिरौती की मांग करते हैं।

साइबर अपराधियों ने कथित तौर पर कंपनी के नेटवर्क से बड़ी मात्रा में डेटा निकालने के बाद उसे डार्क वेब पर पोस्ट करने की धमकी दी।
630GB डेटा लीक होने का दावा

मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि करीब 630 गीगाबाइट डेटा डार्क वेब पर अपलोड किया गया है। इस डेटा में कंपनी की आंतरिक जानकारी, ईमेल रिकॉर्ड, कर्मचारियों से संबंधित दस्तावेज और कुछ तकनीकी डिजाइन फाइलें शामिल बताई जा रही हैं।

हालांकि, लीक हुए डेटा की वास्तविकता और उसकी सीमा को लेकर स्वतंत्र स्तर पर पुष्टि नहीं हुई है। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी जांच कर रहे हैं।
ऐपल और टेस्ला से जुड़े दस्तावेज होने का दावा
रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि लीक हुए डेटा में वैश्विक कंपनियों से संबंधित कुछ तकनीकी दस्तावेज मौजूद हो सकते हैं। टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स वर्तमान में इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स और सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन में तेजी से विस्तार कर रही है तथा कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के साथ काम कर रही है।
कंपनी ने वर्ष 2023 में भारत में आईफोन निर्माण से जुड़ी गतिविधियों का विस्तार किया था। वहीं 2024 में इलेक्ट्रॉनिक और सेमीकंडक्टर सप्लाई से जुड़े कई वैश्विक समझौते भी किए गए थे।
कंपनी ने क्या कहा?
टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने कथित साइबर हमले की जानकारी मिलने की पुष्टि करते हुए कहा है कि कंपनी ने घटना का संज्ञान कुछ सप्ताह पहले ही ले लिया था और आवश्यक सुरक्षा कदम उठाए गए हैं।
कंपनी के अनुसार, इस साइबर घटना का उसकी उत्पादन इकाइयों, विनिर्माण गतिविधियों या व्यावसायिक संचालन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है। साथ ही सुरक्षा विशेषज्ञों और संबंधित एजेंसियों के साथ मिलकर मामले की जांच की जा रही है।

डेटा सुरक्षा पर उठे सवाल
इस घटना ने एक बार फिर कॉर्पोरेट डेटा सुरक्षा और साइबर सुरक्षा ढांचे को लेकर चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल युग में बड़ी कंपनियों के लिए साइबर हमले सबसे बड़े खतरों में से एक बन चुके हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, रैनसमवेयर हमले केवल डेटा चोरी तक सीमित नहीं रहते, बल्कि कंपनियों की प्रतिष्ठा, ग्राहकों के विश्वास और व्यावसायिक संचालन पर भी गंभीर असर डाल सकते हैं।
फिलहाल मामले की जांच जारी है और यह स्पष्ट होने का इंतजार है कि कथित रूप से लीक हुए डेटा में वास्तव में क्या-क्या जानकारी शामिल है तथा हैकर्स द्वारा किए गए दावों में कितनी सच्चाई है।