दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने पाकिस्तान समर्थित एक बड़े आतंकी नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। जांच में सामने आया है कि पाकिस्तान की राजधानी Islamabad में एक कथित “आतंकी कॉल सेंटर” संचालित किया जा रहा था, जहां से भारत में खासकर दिल्ली-एनसीआर में दहशत फैलाने की साजिशें रची जा रही थीं।
इस नेटवर्क के तार पाकिस्तान स्थित गैंगस्टर Shahzad Bhatti और ISI समर्थित संगठन Tehreek-e-Taliban Hindustan से जुड़े पाए गए हैं। जांच एजेंसियों के मुताबिक, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए भारतीय युवाओं को टारगेट किया जाता था और उन्हें पैसों व कट्टरपंथी प्रचार के जरिए नेटवर्क से जोड़ा जाता था।
स्पेशल सेल ने इस मॉड्यूल के 12 सदस्यों की पहचान की है। इन पर आरोप है कि इन्हें दिल्ली और आसपास के इलाकों में पुलिसकर्मियों को निशाना बनाने, धार्मिक नेताओं और धार्मिक स्थलों पर हमले की योजना तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई थी। मकसद था — देश में भय, अस्थिरता और सांप्रदायिक तनाव फैलाना।

जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी दिल्ली-एनसीआर में TTH के समर्थन में दीवारों पर ग्रैफिटी बनाते थे और संगठन के प्रचार वाले पोस्टर लगाते थे। इनमें आबिद जट्ट नामक आतंकी के पोस्टर भी शामिल थे। हाल ही में पंजाब के अमृतसर में एक ASI की हत्या की जिम्मेदारी TTH ने ली थी, जिसके बाद एजेंसियां और सतर्क हो गई थीं।
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने आरोपियों के पास से 5 अवैध हथियार, 10 जिंदा कारतूस, पोस्टर, आपत्तिजनक सामग्री और कई डिजिटल सबूत बरामद किए हैं। जांच में पुलिसकर्मियों की रेकी, धमकी वाले वीडियो और हथियारों के प्रदर्शन की रिकॉर्डिंग भी मिली है, जिन्हें पाकिस्तान भेजा जाता था।
गिरफ्तार आरोपियों में सोहेल, सोनू मीणा, सचिन मीणा, मोहम्मद कैफ, मोहम्मद रिहान, सोयब, रवि कश्यप और अनमोल राय जैसे नाम शामिल हैं। इन सभी की भूमिका अलग-अलग थी — कोई हथियार जुटा रहा था, कोई ग्रैफिटी बना रहा था, कोई युवाओं की भर्ती कर रहा था और कोई रेकी कर रहा था।

सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि यह केवल एक आपराधिक गिरोह नहीं, बल्कि एक संगठित आतंक-समर्थित नेटवर्क है, जो सोशल मीडिया, फंडिंग और स्थानीय अपराधियों के जरिए देश में अस्थिरता फैलाने की तैयारी कर रहा था। अब एजेंसियां इस नेटवर्क की विदेशी फंडिंग, डिजिटल कनेक्शन और बाकी सक्रिय सदस्यों की तलाश में जुटी हैं।


