द्वारका एक्सप्रेसवे पर बढ़ते टोल शुल्क से परेशान गुरुग्राम के निवासियों ने अब राहत की मांग उठाई है। बढ़ी हुई स्कूल बस फीस और कैब किराए में लगातार हो रही बढ़ोतरी को देखते हुए द्वारका एक्सप्रेसवे गुरुग्राम विकास संघ (डीएक्सपीजीडीए) ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) और भारतीय राजमार्ग प्रबंधन कंपनी लिमिटेड (आईएचएमसीएल) को पत्र लिखकर विशेष रियायत देने की मांग की है।
संघ ने 11 जून को आईएचएमसीएल के अध्यक्ष विशाल चौहान को पत्र भेजा, जिसकी प्रति द्वारका एक्सप्रेसवे परियोजना निदेशक आकाश पाधी को भी भेजी गई। पत्र में खासतौर पर एनसीआर क्षेत्र में चलने वाली पंजीकृत स्कूल बसों और विद्युत चालित टैक्सियों के लिए टोल में छूट देने की मांग की गई है।
संघ का कहना है कि बढ़े हुए टोल शुल्क का सीधा असर आम लोगों पर पड़ रहा है। स्कूलों ने परिवहन लागत बढ़ने के कारण फीस में इजाफा कर दिया है, जबकि छोटी दूरी के लिए कैब का किराया कई बार टोल शुल्क के कारण दोगुना तक हो जाता है। इससे रोजाना सफर करने वाले लोगों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।
संघ के पदाधिकारियों के मुताबिक, टोल शुल्क इतना अधिक है कि लोगों के रिश्तेदार और मित्र भी अब इस इलाके में आने से बचने लगे हैं। उनका मानना है कि यदि स्कूल बसों और साझा परिवहन को रियायत मिलती है, तो हजारों परिवारों को राहत मिलेगी।
इसके अलावा संघ ने बिजवासन टोल प्लाजा पर स्थानीय यात्रियों के लिए त्रैमासिक और वार्षिक पास की सुविधा शुरू करने की मांग भी रखी है। उनका कहना है कि लंबी अवधि के पास से बार-बार नवीनीकरण की परेशानी खत्म होगी और यात्रियों को बेहतर छूट मिल सकेगी।

संघ ने यह भी सुझाव दिया है कि एनएचएआई की वेबसाइट और मोबाइल अनुप्रयोग को और सरल व बेहतर बनाया जाए, ताकि लोग अपने पास की स्थिति, यात्रा का विवरण, शेष यात्राएं और समाप्ति की तारीख आसानी से देख सकें।
फिलहाल बिजवासन टोल प्लाजा पर निजी कारों के लिए एक तरफ का शुल्क 225 रुपये और आने-जाने का शुल्क 340 रुपये है। 50 यात्राओं के मासिक पास की कीमत 7,550 रुपये है, जबकि 20 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले स्थानीय निवासियों के लिए रियायती पास 350 रुपये में उपलब्ध है। वहीं व्यावसायिक टैक्सियों के लिए यह शुल्क और भी अधिक है।
एनएचएआई के एक अधिकारी ने कहा है कि इस प्रस्ताव की समीक्षा की जाएगी, लेकिन अंतिम निर्णय मुख्यालय स्तर पर लिया जाएगा। यदि यह मांग मंजूर होती है, तो द्वारका एक्सप्रेसवे से रोज गुजरने वाले हजारों यात्रियों को बड़ी राहत मिल सकती है।



