पश्चिम बंगाल की राजनीति में रविवार को बड़ा उलटफेर देखने को मिला, जब तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 19 बागी सांसदों ने पार्टी से अलग होकर नई राजनीतिक राह अपनाने का संकेत दिया। इन सांसदों ने ‘नेशनलिस्ट सिटीजन पार्टी ऑफ इंडिया’ (NCPI) में विलय की घोषणा करते हुए भाजपा नेतृत्व वाले एनडीए को समर्थन देने की बात कही। यह घटनाक्रम पार्टी के भीतर गहराते संकट को और बढ़ाने वाला माना जा रहा है।
दिल्ली में रविवार को बागी सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल पहले केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के आवास पहुंचा, जहां कई घंटों तक बैठक चली। इसके बाद यह समूह लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मिला और संसद में अलग बैठने की मांग रखी।
बागी सांसदों में सुदीप बंद्योपाध्याय, काकोली घोष दस्तिदार और शताब्दी रॉय जैसे बड़े नाम शामिल हैं। बागी गुट का दावा है कि उनके साथ पार्टी के दो-तिहाई से अधिक सांसद हैं, जिससे दल-बदल कानून के तहत उनकी स्थिति मजबूत हो सकती है।

काकोली घोष दस्तिदार ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उनका गुट अब आधिकारिक रूप से NCPI में शामिल हो चुका है और राष्ट्रीय हित में प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व में एनडीए के साथ काम करेगा। वहीं, सुदीप बंद्योपाध्याय ने कहा कि अब असली तृणमूल कांग्रेस कौन है, इसका फैसला अदालत में होगा।
दूसरी ओर, टीएमसी नेतृत्व ने इस घटनाक्रम पर कड़ा रुख अपनाया है। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा स्पीकर को पत्र लिखकर मांग की है कि किसी भी अलग गुट को आधिकारिक मान्यता न दी जाए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि लोकसभा में टीएमसी का प्रतिनिधित्व केवल अधिकृत नेतृत्व और पार्टी व्हिप के जरिए ही होना चाहिए।

इस बीच पश्चिम बंगाल के नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने दावा किया कि टीएमसी आने वाले दिनों में और कमजोर हो सकती है। उन्होंने कहा कि पार्टी के भीतर असंतोष तेजी से बढ़ रहा है और कई नेता अब नए विकल्प तलाश रहे हैं।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर यह टूट औपचारिक रूप लेती है, तो इससे पश्चिम बंगाल की राजनीति और संसद दोनों में शक्ति संतुलन पर बड़ा असर पड़ सकता है।

