तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान एक बार फिर खुलकर सामने आई है। पार्टी के वरिष्ठ सांसद Kalyan Banerjee ने हाल ही में पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव Abhishek Banerjee पर तीखा हमला बोला था, लेकिन अब उनके सुर अचानक बदलते नजर आ रहे हैं। अपने हालिया बयान में कल्याण बनर्जी ने अभिषेक को “अपने बेटे जैसा” बताते हुए सुलह का संकेत दिया है।
समाचार एजेंसी ANI से बातचीत में कल्याण बनर्जी ने कहा कि अभिषेक उनके बेटे जैसे हैं और बेटे की गलतियों को माफ करना एक पिता का कर्तव्य होता है। उनका यह बयान पार्टी के भीतर जारी तनाव को कम करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
यह नरमी इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि कुछ दिन पहले ही कल्याण बनर्जी ने अभिषेक बनर्जी पर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने कहा था कि अभिषेक का व्यवहार अहंकारी है और उनकी वजह से पार्टी को नुकसान उठाना पड़ रहा है। इतना ही नहीं, उन्होंने पार्टी प्रमुख Mamata Banerjee को यह तक कह दिया था कि उन्हें अपने और अभिषेक में से किसी एक को चुनना होगा।
कल्याण बनर्जी ने उस समय साफ कहा था कि अगर ममता बनर्जी ने अपने भतीजे का साथ दिया तो उन्हें कोई बड़ा फैसला लेना पड़ सकता है। इस बयान ने TMC के भीतर गुटबाजी और नेतृत्व को लेकर सवाल खड़े कर दिए थे।

हालांकि अब उनके बदले हुए रुख से संकेत मिल रहे हैं कि पार्टी नेतृत्व ने शायद अंदरूनी मतभेदों को संभालने की कोशिश शुरू कर दी है। राजनीतिक जानकार इसे डैमेज कंट्रोल की रणनीति भी मान रहे हैं।
कल्याण बनर्जी ने पश्चिम बंगाल की राजनीतिक स्थिति को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि राज्य में लोकतंत्र खतरे में है और विपक्ष को लगातार दबाव का सामना करना पड़ रहा है। उनका आरोप था कि राजनीतिक माहौल लगातार तनावपूर्ण होता जा रहा है।
उन्होंने उन खबरों पर भी प्रतिक्रिया दी जिनमें कहा जा रहा है कि कुछ बागी सांसद लोकसभा अध्यक्ष Om Birla से संपर्क करने की तैयारी में हैं। इस पर उन्होंने कहा कि जो लोग पार्टी छोड़ने की सोच रहे हैं, उन्हें अंततः भाजपा की शरण लेनी होगी।
कल्याण बनर्जी ने यह भी दावा किया कि TMC और कांग्रेस के बीच विलय की जो चर्चाएं चल रही हैं, उनमें कोई सच्चाई नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी अपनी स्वतंत्र पहचान के साथ आगे बढ़ेगी।
TMC के भीतर यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब पश्चिम बंगाल में राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। ऐसे में पार्टी के भीतर नेतृत्व और संगठनात्मक एकजुटता को लेकर उठ रहे सवाल आने वाले दिनों में और महत्वपूर्ण हो सकते हैं।


