दिल्ली के मालवीय नगर स्थित फ्लोरिश स्टे होटल में हुए भीषण अग्निकांड में 21 लोगों की मौत के बाद प्रशासन हरकत में आ गया है। हादसे में 12 विदेशी नागरिकों के भी जान गंवाने की बात सामने आई है। घटना के बाद दिल्ली सरकार, एमसीडी, पुलिस और अन्य एजेंसियों ने संयुक्त जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में मालवीय नगर और हौज रानी क्षेत्र की 18 ऐसी संपत्तियों की पहचान की गई है, जिन पर अवैध निर्माण और फायर सेफ्टी नियमों के उल्लंघन के आरोप हैं। इन पर जल्द सीलिंग और अन्य सख्त कार्रवाई की जा सकती है।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि इलाके के कई होटल और व्यावसायिक प्रतिष्ठान बिना आवश्यक सुरक्षा मानकों के संचालित हो रहे थे। दिल्ली फायर सर्विस के अधिकारियों का दावा है कि प्रभावित क्षेत्र के किसी भी होटल के पास वैध फायर एनओसी नहीं थी। इस खुलासे के बाद यह सवाल उठ रहा है कि यदि सुरक्षा मंजूरी नहीं थी, तो ये होटल इतने लंबे समय तक संचालन कैसे करते रहे।
हादसे के बाद कई होटलों को बंद कर दिया गया है और कुछ ने अपने बोर्ड तक हटा दिए हैं। इस बीच, विदेशी पर्यटक वैकल्पिक ठहरने की जगह तलाशते नजर आए। प्रशासन ने डीएम, एमसीडी, दिल्ली पुलिस और बिजली विभाग के अधिकारियों की एक संयुक्त समिति गठित की है, जो पूरे शहर में अवैध निर्माण, लाइसेंस और फायर सेफ्टी मानकों की जांच करेगी।
हालांकि सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि सुरक्षा खामियां पहले से मौजूद थीं, तो कार्रवाई समय रहते क्यों नहीं की गई। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस त्रासदी के लिए केवल होटल प्रबंधन जिम्मेदार है या निगरानी और नियमन से जुड़े विभागों की भी जवाबदेही तय होगी।




