दिल्ली के मालवीय नगर स्थित होटल में हुए भीषण अग्निकांड के बाद देशभर में फायर सेफ्टी व्यवस्थाओं को लेकर चिंता बढ़ गई है। इस दर्दनाक हादसे में 21 लोगों की मौत के बाद विभिन्न शहरों में होटलों, हॉस्टलों और लॉज की सुरक्षा व्यवस्था की पड़ताल की गई, जिसमें कई जगह गंभीर खामियां सामने आईं।
राजधानी दिल्ली में जांच के दौरान कई ऐसी इमारतें मिलीं जहां रिहायशी परिसरों में व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही थीं। कुछ भवनों में आपातकालीन निकास मार्ग अपर्याप्त पाए गए, जबकि बेसमेंट और अन्य हिस्सों में सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया जा रहा था। कई इमारतें संभावित दुर्घटना का खतरा पैदा करती नजर आईं।
मुंबई में भी कुछ होटल और हॉस्टल सुरक्षा मानकों को लेकर सवालों के घेरे में दिखाई दिए। कई जगह प्रवेश और निकास के लिए केवल एक ही रास्ता मिला, जबकि कुछ प्रतिष्ठानों ने फायर सेफ्टी संबंधी जानकारी साझा करने से भी इनकार कर दिया। हालांकि कुछ संस्थानों ने वैध अग्नि सुरक्षा प्रमाणपत्र और आधुनिक सुरक्षा प्रणालियों का दावा किया।
बेंगलुरु के व्यस्त गांधीनगर क्षेत्र में संकरी गलियों और एकल प्रवेश-निकास वाले कई होटल मिले, जिससे आपातकालीन स्थिति में राहत कार्य प्रभावित होने की आशंका जताई गई। वहीं लखनऊ में एक होटल में फायर बॉक्स जाम मिला, कई उपकरण एक्सपायर पाए गए और गैस सिलेंडरों के आसपास सुरक्षा इंतजाम नाकाफी नजर आए।
पटना में बड़े होटलों में फायर सेफ्टी व्यवस्था अपेक्षाकृत बेहतर पाई गई, लेकिन छोटे होटलों में केवल अग्निशमन सिलेंडरों पर निर्भरता दिखाई दी। कई स्थानों पर सुरक्षा उपकरणों की वैधता अवधि समाप्त हो चुकी थी, जिससे सुरक्षा मानकों के पालन पर सवाल खड़े हुए।

मालवीय नगर हादसे के बाद सामने आई ये तस्वीरें दर्शाती हैं कि देश के कई शहरों में फायर सेफ्टी नियमों का पालन अब भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित निरीक्षण, सख्त कार्रवाई और जागरूकता के बिना भविष्य में ऐसे हादसों को रोकना मुश्किल होगा।



