केंद्र सरकार संसद के आगामी मानसून सत्र में परिसीमन से जुड़ा विधेयक लाने की तैयारी कर रही है। सूत्रों के अनुसार, इस बार सरकार किसी भी बड़े राजनीतिक विवाद से बचने के लिए पहले ही प्रमुख क्षेत्रीय दलों के साथ बातचीत कर रही है। इसी क्रम में तृणमूल कांग्रेस (TMC) और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) समेत कई दलों से संपर्क किया गया है।
जानकारी के मुताबिक, सरकार का उद्देश्य विधेयक पेश करने से पहले व्यापक सहमति बनाना है। पिछले वर्षों में परिसीमन के मुद्दे पर विभिन्न राज्यों, विशेषकर दक्षिण भारत के राजनीतिक दलों ने अपनी चिंताएं जताई थीं। ऐसे में केंद्र इस बार सभी पक्षों की राय लेकर आगे बढ़ना चाहता है।

सूत्रों का कहना है कि TMC के कुछ सांसद बातचीत के लिए सकारात्मक रुख दिखा रहे हैं, हालांकि पार्टी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। वहीं DMK ने भी फिलहाल किसी प्रकार का कड़ा विरोध दर्ज नहीं कराया है और सरकार के प्रस्तावित ड्राफ्ट का इंतजार कर रही है।
परिसीमन वह प्रक्रिया है जिसके तहत जनसंख्या और भौगोलिक बदलावों के आधार पर लोकसभा और विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं का पुनर्निर्धारण किया जाता है। इसका उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों को जनसंख्या के अनुपात में प्रतिनिधित्व प्रदान करना होता है।
हालांकि इस मुद्दे पर सबसे बड़ी चिंता दक्षिणी राज्यों द्वारा जताई जा रही है। इन राज्यों का तर्क है कि उन्होंने वर्षों तक जनसंख्या नियंत्रण नीतियों को सफलतापूर्वक लागू किया है। यदि भविष्य में केवल जनसंख्या के आधार पर सीटों का पुनर्वितरण किया गया, तो उनकी संसदीय हिस्सेदारी कम हो सकती है, जबकि अधिक जनसंख्या वाले राज्यों की सीटें बढ़ सकती हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यही कारण है कि परिसीमन का विषय केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि राजनीतिक और संघीय संतुलन से भी जुड़ा हुआ है। सरकार अब ऐसा समाधान तलाशने की कोशिश कर रही है जिससे प्रतिनिधित्व और क्षेत्रीय संतुलन दोनों बनाए रखे जा सकें।
भारत में अब तक चार बार परिसीमन की प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है। यह 1952, 1962, 1973 और 2002 में लागू की गई थी। वर्तमान में लोकसभा की 543 सीटों की संख्या लंबे समय से स्थिर बनी हुई है।
मानसून सत्र आमतौर पर जुलाई के तीसरे सप्ताह में शुरू होता है। यदि सरकार प्रस्तावित ड्राफ्ट पर पर्याप्त राजनीतिक समर्थन जुटाने में सफल रहती है, तो यह विधेयक इसी सत्र में संसद के समक्ष पेश किया जा सकता है। फिलहाल सभी दलों की नजर सरकार के नए मसौदे और उसके प्रावधानों पर टिकी हुई है।


