प्रवर्तन निदेशालय (ED) के वरिष्ठ अधिकारी सत्यब्रत कुमार ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) ले ली है। मनी लॉन्ड्रिंग और वित्तीय अपराधों से जुड़े कई चर्चित मामलों की जांच का नेतृत्व कर चुके कुमार के इस फैसले ने प्रशासनिक और जांच एजेंसियों के गलियारों में चर्चा बढ़ा दी है।
सूत्रों के अनुसार, 2004 बैच के अधिकारी सत्यब्रत कुमार ने कुछ समय पहले स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के लिए आवेदन किया था, जिसे केंद्र सरकार ने मंजूरी दे दी है। 48 वर्षीय अधिकारी के पास अभी लगभग 11 वर्ष की सेवा शेष थी, लेकिन उन्होंने व्यक्तिगत कारणों से सरकारी सेवा छोड़ने का निर्णय लिया।
सत्यब्रत कुमार ने करीब 12 वर्षों तक प्रवर्तन निदेशालय में विभिन्न महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। लंबे समय तक एजेंसी में कार्य करने के कारण उन्हें ईडी के सबसे अनुभवी अधिकारियों में गिना जाता रहा। हाल ही में उन्हें पश्चिम बंगाल के सिलिगुड़ी में कमिश्नर (अपील) के पद पर नियुक्त किया गया था।
उनका नाम देश के सबसे बड़े बैंकिंग और वित्तीय घोटालों की जांच से जुड़ा रहा है। पंजाब नेशनल बैंक (PNB) धोखाधड़ी मामले में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इस मामले में नीरव मोदी और मेहुल चोकसी से संबंधित कथित अवैध संपत्तियों की पहचान और कुर्की की कार्रवाई में उनका योगदान उल्लेखनीय माना जाता है।

इसके अलावा महादेव ऑनलाइन बेटिंग ऐप से जुड़े चर्चित मामले की जांच में भी उन्होंने अहम जिम्मेदारी निभाई। इस जांच के दौरान कई राजनीतिक और कारोबारी संबंधों की जांच की गई थी, जिसने राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरी थीं।
अधिकारियों के अनुसार, सत्यब्रत कुमार का नियमित कार्यकाल वर्ष 2037 तक था। इसके बावजूद उन्होंने समय से पहले सेवा छोड़ने का फैसला किया। पिछले कुछ वर्षों में यह दूसरा बड़ा मामला है, जब ईडी से जुड़े किसी वरिष्ठ अधिकारी ने निर्धारित सेवानिवृत्ति आयु से काफी पहले सरकारी सेवा छोड़ने का निर्णय लिया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि हाई-प्रोफाइल मामलों की जांच में शामिल रहे अधिकारियों के ऐसे फैसले हमेशा चर्चा का विषय बनते हैं। फिलहाल सत्यब्रत कुमार ने अपने भविष्य की योजनाओं को लेकर सार्वजनिक रूप से कोई विस्तृत जानकारी साझा नहीं की है।


