दक्षिण दिल्ली के साकेत इलाके में हुए दर्दनाक इमारत हादसे ने कई परिवारों को गहरा दुख दिया है। इस हादसे के बीच एक नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है — ‘पार्वती आंटी’। छात्रों के बीच बेहद लोकप्रिय पार्वती ओझा ने अपनी जान की परवाह किए बिना दूसरों को बचाने की कोशिश की और इसी दौरान मलबे में दब गईं।
बताया जा रहा है कि हादसे से ठीक पहले पार्वती ओझा अपनी कैंटीन से बाहर निकल आई थीं। लेकिन जब उन्हें पता चला कि कुछ छात्र अभी भी अंदर मौजूद हैं, तो वे दोबारा भवन के भीतर चली गईं ताकि उन्हें बाहर निकलने की चेतावनी दे सकें। कुछ ही सेकंड बाद पूरी इमारत भरभराकर गिर गई और वह खुद भी मलबे में फंस गईं।

पार्वती ओझा ‘आंटी वाला किचन’ नाम से एक छोटी कैंटीन चलाती थीं, जो आसपास रहने वाले मेडिकल, इंजीनियरिंग और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों के बीच काफी लोकप्रिय थी। छात्र उन्हें सिर्फ कैंटीन संचालक नहीं, बल्कि परिवार के सदस्य की तरह मानते थे। कई छात्रों का कहना है कि वह हमेशा उनका ख्याल रखती थीं और जरूरत पड़ने पर बिना पैसे लिए भी खाना खिला देती थीं।
परिजनों के मुताबिक, हादसे के समय कैंटीन में कई छात्र मौजूद थे। इमारत गिरने के संकेत मिलने पर लोग बाहर निकलने लगे, लेकिन पार्वती आंटी वापस अंदर चली गईं। उनके रिश्तेदारों का कहना है कि उनकी पहली चिंता अपनी जान नहीं, बल्कि अंदर मौजूद छात्रों की सुरक्षा थी।

करीब 16 घंटे तक चले राहत एवं बचाव अभियान के बाद उन्हें मलबे से बाहर निकाला गया, लेकिन अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस हादसे में कुल छह लोगों की जान गई, जबकि कई अन्य घायल हुए हैं।
हादसे के बाद इलाके में शोक का माहौल है। बड़ी संख्या में छात्र और स्थानीय लोग पार्वती आंटी को याद कर रहे हैं। कई छात्रों ने कहा कि उन्होंने अपने अंतिम क्षणों में भी दूसरों की जान बचाने की कोशिश की और यही उन्हें एक सच्ची नायिका बनाता है।
इस बीच प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है। इमारत गिरने के कारणों की पड़ताल की जा रही है और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही गई है।


