मई का महीना खेती-किसानी के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जाता है. इस दौरान जहां गेहूं की कटाई का काम पूरा होता है, वहीं जायद फसलों की देखभाल और खरीफ सीजन की तैयारी भी शुरू हो जाती है. बिहार कृषि विभाग ने किसानों के लिए विभिन्न फसलों को लेकर जरूरी सुझाव जारी किए हैं, ताकि बेहतर उत्पादन के साथ फसलों को कीट और बीमारियों से बचाया जा सके.
प्याज की फसल में करें कीट नियंत्रण
प्याज की फसल में थ्रिप्स कीट का खतरा बढ़ सकता है. इससे बचाव के लिए समय पर दवा और उचित प्रबंधन अपनाने की सलाह दी गई है. साथ ही बरसात में होने वाली प्याज की खेती के लिए अभी से नर्सरी तैयार करने को कहा गया है, ताकि समय पर रोपाई की जा सके.
तिल की फसल में नमी बनाए रखें

गरमा मौसम में बोई गई तिल की फसल में नियमित सिंचाई जरूरी है. खेत में पर्याप्त नमी बनाए रखने के साथ कीटों की निगरानी करते रहें और जरूरत पड़ने पर दवा का छिड़काव करें.
मूंग और उड़द में करें निराई-गुड़ाई
मूंग और उड़द की फसल में खरपतवार नियंत्रण के लिए समय-समय पर निराई-गुड़ाई करते रहें. यदि फसल में तना मक्खी का प्रकोप दिखाई दे तो इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एसएल की 1 मिली मात्रा को 3 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करने की सलाह दी गई है.
मक्का और सूरजमुखी की कटाई समय पर करें
मक्का की फसल में धड़छेदक कीट से बचाव के उपाय अपनाने की जरूरत है. वहीं महीने के अंत तक बसंतकालीन मक्का और सूरजमुखी की कटाई पूरी कर लेने को कहा गया है. कटाई के बाद दानों को अच्छी तरह सुखाकर ही भंडारण करें.
खरीफ फसलों के लिए खेत तैयार करें

खरीफ धान और वर्षाकालीन मक्का की खेती के लिए खेतों की तैयारी शुरू करने की सलाह दी गई है. खेत में जैविक खाद मिलाकर मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने पर जोर दिया गया है.
धान के बीज और नर्सरी की तैयारी
कृषि विभाग ने किसानों से कहा है कि वे अभी से धान के अच्छे बीजों की व्यवस्था कर लें. राजेंद्र मंसूरी और नाटी मंसूरी जैसी किस्मों के लिए नर्सरी तैयार करने और बीजोपचार करने की सलाह दी गई है.
हरी खाद के लिए करें ढैंचा या मूंग की बुवाई
धान वाले खेतों में मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने के लिए मई की शुरुआत में ढैंचा या मूंग की बुवाई करना लाभदायक बताया गया है. इससे खेत में जैविक तत्व बढ़ते हैं और फसल को बेहतर पोषण मिलता है.
गर्मी में फसलों की देखभाल के जरूरी उपाय

सुबह या शाम को करें सिंचाई
तेज गर्मी में दोपहर के समय सिंचाई करने से पौधों की जड़ों को नुकसान हो सकता है. इसलिए सुबह जल्दी या शाम के समय पानी देना बेहतर माना गया है.
मल्चिंग से बचाएं नमी
खेत में पुआल या सूखी घास बिछाने से मिट्टी में नमी बनी रहती है और पानी की बचत होती है. इससे गर्मी का असर भी कम पड़ता है.
कीटों की नियमित निगरानी जरूरी
सब्जियों, धान की नर्सरी और बागवानी फसलों में गर्मी के दौरान कीट तेजी से फैल सकते हैं. इसलिए समय-समय पर खेतों की जांच करते रहें.
मौसम देखकर बनाएं खेती की योजना
किसानों को सलाह दी गई है कि वे मौसम की जानकारी के आधार पर खेती से जुड़े फैसले लें, ताकि अचानक बदलते मौसम से फसलों को नुकसान न हो.