टीबी) को आमतौर पर फेफड़ों की बीमारी माना जाता है, लेकिन यह शरीर के अन्य हिस्सों को भी प्रभावित कर सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, आंखों में होने वाली टीबी को ऑक्यूलर ट्यूबरकुलोसिस (Ocular TB) कहा जाता है, जो समय पर पहचान न होने पर नजर को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आंकड़ों के मुताबिक, यह बीमारी आज भी दुनिया भर में लाखों लोगों की मौत का कारण बन रही है। भारत समेत कई देशों में टीबी अब भी एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बनी हुई है।

आंखों में टीबी होने की स्थिति तब पैदा होती है जब Mycobacterium tuberculosis बैक्टीरिया शरीर के अन्य हिस्सों से आंखों तक पहुंच जाता है। यह संक्रमण सीधे आंखों को प्रभावित कर सकता है या शरीर में पहले से मौजूद टीबी के कारण फैल सकता है।

इस बीमारी के लक्षण शुरुआत में सामान्य आंखों की समस्या जैसे लग सकते हैं, लेकिन धीरे-धीरे यह गंभीर रूप ले सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, अगर समय रहते पहचान न हो तो यह स्थायी रूप से दृष्टि को प्रभावित कर सकता है।
आंखों में टीबी के कुछ प्रमुख लक्षण इस प्रकार हैं— आंखों में लगातार लालिमा रहना, दर्द या जलन महसूस होना, धुंधला दिखाई देना, रोशनी के प्रति संवेदनशीलता (फोटोफोबिया), आंखों में सूजन या पानी आना और कुछ मामलों में नजर कमजोर होना। कई बार मरीज को आंखों में फ्लोटर्स (तैरते धब्बे) भी दिखाई दे सकते हैं।
डॉक्टरों का कहना है कि इन लक्षणों को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। अगर किसी व्यक्ति को लंबे समय तक आंखों में ऐसी समस्याएं बनी रहती हैं, तो तुरंत नेत्र विशेषज्ञ से जांच करानी चाहिए।
इलाज की बात करें तो आंखों की टीबी का उपचार एंटी-टीबी दवाओं (ATT) के जरिए किया जाता है। कई मामलों में सूजन कम करने के लिए स्टेरॉयड दवाएं भी दी जाती हैं। सही समय पर इलाज शुरू होने से इस बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है और दृष्टि को बचाया जा सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि टीबी सिर्फ फेफड़ों तक सीमित नहीं है, इसलिए इसके लक्षण शरीर के किसी भी हिस्से में दिख सकते हैं। ऐसे में जागरूक रहना और समय पर जांच कराना ही सबसे बड़ा बचाव है।