मेट्रो स्टेशनों पर एक्सकेलेटर (स्वचालित सीढ़ियां) हमारी यात्रा को आसान जरूर बनाते हैं, लेकिन जरा सी लापरवाही गंभीर दुर्घटना में बदल सकती है। पिछले कुछ वर्षों में कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां यात्रियों की छोटी गलती बड़ी परेशानी का कारण बनी। ऐसे में जरूरी है कि एक्सकेलेटर इस्तेमाल करते समय कुछ बेसिक नियम हमेशा याद रखें।

सबसे पहली और आम गलती है स्टेप्स के किनारों पर बनी पीली लाइन पर पैर रखना। यह लाइन सुरक्षा के लिए होती है, लेकिन कई लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं। ऐसा करने से जूते या कपड़े मशीन के गैप में फंस सकते हैं और हादसा हो सकता है।

दूसरी बड़ी गलती है गलत दिशा में चलने की कोशिश करना। कई लोग जल्दी के चक्कर में नीचे जाने वाले एक्सकेलेटर पर ऊपर चढ़ने लगते हैं या ऊपर जाने वाले पर दौड़ते हुए नीचे आने की कोशिश करते हैं। इससे संतुलन बिगड़ सकता है और गिरने का खतरा बढ़ जाता है।

तीसरी गलती है हैंडरेल (साइड की चलती पट्टी) को नजरअंदाज करना। एक्सकेलेटर चलते समय हल्का झटका भी दे सकता है, ऐसे में अगर आपने पकड़ नहीं रखी तो पीछे गिर सकते हैं। खासकर बुजुर्गों और बच्चों के लिए यह और भी जरूरी है।
चौथी खतरनाक आदत है एक्सकेलेटर पर बैठना या किनारे लगे ब्रश पर पैर रगड़ना। कई लोग मजाक या लापरवाही में ऐसा करते हैं, लेकिन यही सबसे बड़ा जोखिम होता है क्योंकि कपड़े या पैर फंस सकते हैं।
बच्चों और बुजुर्गों के मामले में अतिरिक्त सावधानी जरूरी है। बच्चों को कभी अकेला न छोड़ें और उनका हाथ पकड़कर रखें। वहीं स्ट्रॉलर, ट्रॉली बैग या ज्यादा सामान के साथ एक्सकेलेटर की जगह लिफ्ट का इस्तेमाल करना ज्यादा सुरक्षित रहता है। साड़ी, दुपट्टा या ढीले फीते वाले जूते पहनते समय खास ध्यान रखें।
अगर किसी का पैर या कपड़ा एक्सकेलेटर में फंस जाए तो घबराने की बजाय तुरंत ऊपर या नीचे लगे लाल रंग के ‘Emergency Stop’ बटन को दबाएं और आसपास के लोगों को आवाज देकर सतर्क करें। साथ ही तुरंत मेट्रो स्टाफ या सुरक्षा कर्मियों को सूचना दें।
सुरक्षित यात्रा के लिए हमेशा स्टेप के बीच में खड़े रहें, फोन में ध्यान न लगाएं और जरूरत हो तो लिफ्ट का इस्तेमाल करें। याद रखें, एक्सकेलेटर सुविधा है, लेकिन सावधानी ही सुरक्षा की असली गारंटी है।