भारतीय हॉकी जगत के लिए एक दुखद खबर सामने आई है। ओलंपिक पदक विजेता Gurbax Singh Grewal का 84 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उन्होंने चंडीगढ़ के पास जीरकपुर में अंतिम सांस ली। बताया जा रहा है कि उनका निधन दिल का दौरा पड़ने के कारण हुआ।

गुरबख्श सिंह भारतीय हॉकी के उन खिलाड़ियों में शामिल थे, जिन्होंने देश को अंतरराष्ट्रीय मंच पर गौरवान्वित किया। वह 1968 के मैक्सिको सिटी ओलंपिक में भारतीय टीम का हिस्सा थे, जहां भारत ने कांस्य पदक जीता था। उस समय टीम के प्रदर्शन में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही थी और उन्होंने अपने खेल से देश का नाम रोशन किया।

उनकी एक खास उपलब्धि यह भी रही कि उसी ओलंपिक में उन्होंने अपने भाई बलबीर सिंह ग्रेवाल के साथ भारत का प्रतिनिधित्व किया। यह भारतीय खेल इतिहास के उन दुर्लभ पलों में से एक था, जब सगे भाई एक साथ ओलंपिक में देश के लिए खेले। यह उपलब्धि आज भी खेल प्रेमियों के बीच याद की जाती है।

गुरबख्श सिंह का योगदान सिर्फ मैदान तक सीमित नहीं रहा। खेल से संन्यास लेने के बाद भी उन्होंने हॉकी से अपना नाता बनाए रखा और खेल प्रशासन में सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने वेस्टर्न रेलवे में वरिष्ठ खेल अधिकारी के रूप में कार्य किया और कई युवा खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके मार्गदर्शन में कई प्रतिभाओं को आगे आने का मौका मिला।
इसके अलावा, उन्होंने मुंबई हॉकी एसोसिएशन के मानद सचिव के रूप में भी अपनी सेवाएं दीं। प्रशासनिक जिम्मेदारियों के दौरान उन्होंने खेल के विकास और संरचना को मजबूत करने के लिए लगातार काम किया। उनका अनुभव और समर्पण भारतीय हॉकी के लिए बेहद मूल्यवान रहा।
गुरबख्श सिंह का निधन भारतीय खेल जगत के लिए एक बड़ी क्षति माना जा रहा है। उन्होंने अपने जीवन में न केवल एक खिलाड़ी के रूप में, बल्कि एक मार्गदर्शक और प्रशासक के रूप में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी।
भारतीय हॉकी के इतिहास में उनका नाम हमेशा सम्मान के साथ लिया जाएगा। उनके योगदान और उपलब्धियां खेल जगत में लंबे समय तक याद की जाती रहेंगी।