करीब एक दशक से ज्यादा समय तक सैन्य मौजूदगी बनाए रखने के बाद United States ने आखिरकार Syria से अपने सभी सैनिकों को वापस बुला लिया है। अप्रैल 2026 में हसाका के कसराक एयरबेस से आखिरी अमेरिकी काफिला निकल गया, जिसके बाद सभी प्रमुख सैन्य ठिकाने सीरियाई सेना के नियंत्रण में आ गए।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक करीब 2000 सैनिक अब Jordan लौट रहे हैं। अमेरिका ने हसाका, रुमैलान और देइर एज-जोर जैसे इलाकों में मौजूद कम से कम सात बड़े सैन्य ठिकानों को खाली किया।

इस घटनाक्रम को सीरिया के लिए एक बड़े राजनीतिक और रणनीतिक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। सीरियाई सरकार ने इसे देश को एकजुट करने की दिशा में अहम कदम बताया है और कहा है कि अब पूरे देश में एक ही प्रशासन लागू करने की प्रक्रिया तेज होगी।

SDF और सरकार के बीच नया समीकरण
अमेरिका की वापसी का सबसे बड़ा असर Syrian Democratic Forces (SDF) पर पड़ा है, जो पिछले कई सालों से उत्तर-पूर्वी सीरिया में प्रभावी ताकत रही है। अमेरिकी समर्थन खत्म होते ही SDF को सीरियाई सरकार के साथ समझौता करना पड़ा।
अब कुर्द लड़ाकों को धीरे-धीरे राष्ट्रीय सेना में शामिल किया जा रहा है और कई अहम शहरों व सीमावर्ती इलाकों पर दमिश्क का नियंत्रण बढ़ चुका है।
क्यों अहम है यह फैसला?
अमेरिका की मौजूदगी के दौरान SDF एक तरह से स्वतंत्र शक्ति की तरह काम कर रहा था। लेकिन जैसे ही अमेरिकी सेना ने वापसी शुरू की, क्षेत्र का पूरा पावर बैलेंस बदल गया।
तेल और गैस संसाधनों पर सरकार का नियंत्रण बढ़ रहा है
तुर्किये का दबाव SDF पर बढ़ गया है
सीरिया में केंद्रीय सत्ता मजबूत होती दिख रही है
सुरक्षा चुनौती अभी बाकी
हालांकि अमेरिकी सेना के जाने के बाद भी खतरे पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं। ISIS के बचे हुए नेटवर्क अब भी सक्रिय बताए जा रहे हैं, जिससे सुरक्षा चुनौती बनी हुई है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले समय में यह फैसला पूरे मध्य-पूर्व की राजनीति और सुरक्षा समीकरण को प्रभावित कर सकता है।