हीमोफीलिया एक दुर्लभ लेकिन गंभीर आनुवंशिक बीमारी है, जिसमें शरीर का ब्लड क्लॉटिंग सिस्टम सही तरीके से काम नहीं करता। यानी अगर किसी व्यक्ति को चोट लग जाए या कट लग जाए, तो खून सामान्य लोगों की तरह जल्दी बंद नहीं होता। कई मामलों में मामूली सी चोट भी जानलेवा साबित हो सकती है।

डॉक्टर्स के अनुसार हीमोफीलिया में शरीर में खून जमाने वाले प्रोटीन यानी क्लॉटिंग फैक्टर्स की कमी होती है। इसी वजह से चोट लगने, सर्जरी होने या अंदरूनी रक्तस्राव की स्थिति में मरीज को ज्यादा खतरा रहता है। कई बार बिना चोट के भी जोड़ों और मांसपेशियों में ब्लीडिंग शुरू हो सकती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह बीमारी अक्सर जन्मजात होती है और पुरुषों में ज्यादा देखने को मिलती है। इसके लक्षणों में बार-बार नाक से खून आना, शरीर पर जल्दी नीले निशान पड़ना, छोटी चोट पर लंबे समय तक खून बहना, जोड़ों में सूजन और दर्द शामिल हैं।

अगर समय रहते इलाज न मिले तो जोड़ों को स्थायी नुकसान, गंभीर रक्तस्राव और जान का खतरा भी हो सकता है। हालांकि आधुनिक इलाज, क्लॉटिंग फैक्टर थेरेपी और नियमित जांच से मरीज सामान्य जीवन जी सकते हैं।
विश्व हीमोफीलिया दिवस पर विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि अगर परिवार में यह बीमारी रही हो या ऐसे लक्षण दिखें, तो तुरंत जांच कराएं और सावधानी बरतें।