ईरान क्यों चाहता है लंबी जंग? अमेरिका और इस्राइल के खिलाफ रणनीति समझिए

International March 10, 2026 By Bharat B. Malviya
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विशेषज्ञों का मानना—धीरे-धीरे थकाने की रणनीति से दबाव बनाना चाहता है तेहरान

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पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच Iran के अधिकारी लगातार संकेत दे रहे हैं कि उनका देश अमेरिका और इस्राइल के साथ लंबी लड़ाई के लिए तैयार है।

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ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव Ali Larijani ने कहा कि ईरान ने खुद को लंबे समय तक चलने वाले संघर्ष के लिए तैयार कर लिया है और फिलहाल बातचीत की संभावना भी नहीं है।

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इसी तरह ईरान की संसद के स्पीकर Mohammad Bagher Ghalibaf ने भी कहा कि उनका देश युद्धविराम के पक्ष में नहीं है और हमलावरों को जवाब देना जरूरी है।

क्या है ईरान की सैन्य रणनीति?

कई विश्लेषकों के अनुसार ईरान की रणनीति “एट्रिशन वॉर” यानी धीरे-धीरे विरोधी को थकाने की है।

इस रणनीति के तहत ईरानी बल लगातार Israel और मध्य-पूर्व में मौजूद United States के सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले कर रहे हैं।

इन हमलों का उद्देश्य विरोधी पक्ष को लगातार सतर्क रखना और उसकी सैन्य क्षमता पर दबाव बनाना है।

महंगे एयर-डिफेंस सिस्टम पर बढ़ता दबाव

अमेरिका और इस्राइल के पास अत्याधुनिक एयर-डिफेंस सिस्टम मौजूद हैं, जैसे:

Patriot Missile System

THAAD

ये सिस्टम तकनीकी रूप से बेहद उन्नत हैं, लेकिन इनकी लागत बहुत ज्यादा है और इनकी संख्या सीमित होती है।

विश्लेषकों का कहना है कि कई बार सस्ते ड्रोन या मिसाइल को गिराने के लिए बेहद महंगे इंटरसेप्टर का इस्तेमाल करना पड़ता है, जिससे विरोधी पक्ष के संसाधनों पर आर्थिक दबाव पड़ सकता है।

लंबी जंग के लिए तैयारी का दावा

ईरान के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता Reza Talaei-Nik ने कहा कि उनका देश जरूरत पड़ने पर दुश्मन की तुलना में कहीं अधिक समय तक संघर्ष जारी रख सकता है।

ईरान का दावा है कि उसके मिसाइल और हथियारों का उत्पादन देश के भीतर ही होता है और उसके पास बड़े भंडार मौजूद हैं। इसी वजह से वह कई महीनों तक उच्च तीव्रता वाला युद्ध जारी रखने में सक्षम है।

आर्थिक असर भी हो सकता है गंभीर

लंबे समय तक चलने वाला संघर्ष वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी बड़ा असर डाल सकता है।

दुनिया के तेल का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा Strait of Hormuz से होकर गुजरता है। अगर इस क्षेत्र में तनाव बढ़ता है तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है, जिससे तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं।

हालांकि युद्ध का असर खुद ईरान की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के कारण ईरान पहले से आर्थिक दबाव में है और लंबे संघर्ष से उसकी आर्थिक स्थिति और कमजोर हो सकती है।

निष्कर्ष

विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान की रणनीति सीधे निर्णायक जीत हासिल करने की बजाय युद्ध को लंबा और महंगा बनाना है।

इस रणनीति का उद्देश्य बड़े और शक्तिशाली देशों की सैन्य बढ़त को संतुलित करना और उन्हें लंबे समय तक दबाव में रखना हो सकता है।

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