केरल के एर्नाकुलम के प्रिंस कुरिसिंकल नोबल और उनके चचेरे भाई मनु फ्रांसिस ने एशियन गेम्स में भारत के लिए खास उपलब्धि हासिल की है। दोनों ने पुरुषों की स्किफ सेलिंग स्पर्धा में सिल्वर मेडल जीता और इस इवेंट में भारत के लिए पदक जीतने वाली पहली जोड़ी बन गए। नोबल के लिए यह पदक सिर्फ खेल की सफलता नहीं, बल्कि उनके जीवन के संघर्ष और पिता की याद से भी जुड़ा है।
2018 की केरल बाढ़ में नोबल ने अपने मछुआरे पिता को खो दिया था। उनका घर समुद्र के करीब था और बचपन से ही पानी से उनका गहरा रिश्ता रहा। इसी जुड़ाव ने उन्हें सेलिंग की ओर बढ़ाया। नोबल ने 13 साल की उम्र में 2009 में इस खेल की शुरुआत की थी, जबकि मनु ने 14 साल की उम्र में सेलिंग अपनाई। दोनों पिछले करीब एक दशक से साथ प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेते आ रहे हैं।
पिता की याद को समर्पित किया पदक
नोबल के लिए एशियन गेम्स का सिल्वर मेडल उस सपने से भी जुड़ा है, जिसे वह अपने पिता के साथ साझा करते थे। उन्होंने बताया कि 2018 की बाढ़ में पिता की मौत के बाद उनकी मां उनका सबसे बड़ा सहारा बनीं। नोबल ने अपना पदक पिता, मां, कोच, शुभचिंतकों और देशवासियों को समर्पित किया।
चचेरे भाई से बने लंबे समय के साथी

प्रिंस और मनु ने केरल के बैकवाटर्स से सेलिंग का सफर शुरू किया और बाद में मुंबई यॉटिंग नोड में ट्रेनिंग ली। दोनों ने 2023 की एशियन चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज मेडल भी जीता था। करीब 10 साल की साझेदारी ने दोनों के बीच ऐसा तालमेल बनाया कि प्रतियोगिता के दौरान उन्हें एक-दूसरे से ज्यादा बातचीत की जरूरत नहीं पड़ती।
यह दोनों का पहला एशियन गेम्स था और पहली ही भागीदारी में उन्होंने सिल्वर मेडल हासिल कर लिया। नोबल ने माना कि तेज हवाओं की परिस्थितियों ने उनके गोल्ड जीतने के मौके को प्रभावित किया, लेकिन उन्होंने इसे हार का बहाना नहीं माना। अब दोनों की नजर नवंबर में होने वाली नेशनल चैंपियनशिप पर है। मनु का मानना है कि उनकी यह उपलब्धि भारत में सेलिंग को और लोकप्रिय बनाने में मदद कर सकती है।
एक ऐसी कहानी, जिसमें बाढ़ ने एक पिता को छीना, समंदर ने बेटे को नई दिशा दी और उसी पानी पर दो भाइयों ने भारत के लिए इतिहास रच दिया।





