अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर टैरिफ को लेकर बड़ा ऐलान किया है। कनाडा पर नए शुल्क की घोषणा के बाद अब उन्होंने अमेरिका में आयात होने वाली जेनेरिक दवाओं पर चरणबद्ध तरीके से 100% और बाद में 200% तक टैरिफ लगाने की योजना का ऐलान किया है। हालांकि, इसके साथ उन्होंने दो वर्षों तक इन दवाओं पर 0% टैरिफ लागू रखने की भी घोषणा की है, जिससे भारतीय दवा उद्योग को फिलहाल राहत मिलने की संभावना है।

दो साल तक मिलेगी राहत
डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर जारी बयान में कहा कि 1 अगस्त से अगले दो वर्षों तक अमेरिका में आयात होने वाली जेनेरिक दवाओं पर कोई टैरिफ नहीं लगाया जाएगा। इसके बाद अगले एक वर्ष के लिए इन दवाओं पर 100% टैरिफ लागू किया जाएगा और बाद में इसे बढ़ाकर 200% तक किया जा सकता है।

क्यों लिया गया यह फैसला?

ट्रंप ने कहा कि इस नीति का उद्देश्य जेनेरिक दवाओं का उत्पादन दोबारा अमेरिका में बढ़ाना है। उनके अनुसार, जो कंपनियां तय समय सीमा के भीतर अमेरिका में उत्पादन इकाइयां स्थापित नहीं करेंगी, उन्हें ऊंचे टैरिफ का सामना करना पड़ेगा।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह प्रस्ताव केवल जेनेरिक दवाओं पर लागू होगा। पेटेंट, ब्रांडेड और इनोवेटिव दवाओं से संबंधित मौजूदा नीतियों में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।
भारत पर क्या होगा असर?
भारत को दुनिया की "फार्मेसी" कहा जाता है क्योंकि अमेरिका में इस्तेमाल होने वाली हर पांच जेनेरिक दवाओं में से एक भारत में तैयार होती है। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के अनुसार, वर्ष 2025 में भारत ने अमेरिका को 9.7 अरब डॉलर मूल्य की जेनेरिक दवाओं का निर्यात किया, जो भारत के कुल वैश्विक दवा निर्यात का लगभग 38 प्रतिशत था।
ऐसे में ट्रंप के फैसले का भारतीय दवा उद्योग पर दीर्घकालिक असर पड़ सकता है। हालांकि, दो वर्षों तक शून्य टैरिफ की व्यवस्था भारतीय कंपनियों को अपनी रणनीति तैयार करने और अमेरिकी बाजार में निवेश बढ़ाने का अवसर दे सकती है।
अमेरिकी बाजार में जेनेरिक दवाओं की अहम भूमिका
अमेरिकी फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) के अनुसार, अमेरिका में बिकने वाली 90 प्रतिशत से अधिक दवाएं जेनेरिक होती हैं। कम कीमत वाली ये दवाएं लाखों अमेरिकी नागरिकों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ और किफायती बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
कंपनियों के पास रणनीति बदलने का समय

विशेषज्ञों का मानना है कि अगले दो वर्षों की छूट के दौरान भारतीय दवा कंपनियां अमेरिका में विनिर्माण इकाइयां स्थापित करने, स्थानीय कंपनियों के साथ साझेदारी बढ़ाने और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने जैसे कदम उठा सकती हैं। इससे भविष्य में प्रस्तावित ऊंचे टैरिफ के प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकेगा।
फिलहाल, ट्रंप की घोषणा के अनुसार भारतीय जेनेरिक दवा निर्यात पर तत्काल कोई असर नहीं पड़ेगा, लेकिन दो वर्ष बाद प्रस्तावित टैरिफ लागू होने की स्थिति में भारतीय फार्मा उद्योग के लिए नई चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं।
