प्रशांत किशोर का बड़ा राजनीतिक दांव: बांकीपुर उपचुनाव लड़ने का ऐलान

Political June 27, 2026 By Rohit Kumar
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जन सुराज अभियान के संस्थापक प्रशांत किशोर ने बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव में उतरने की घोषणा कर दी है। यह फैसला इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि 2025 के विधानसभा चुनाव से पहले उन्होंने स्वयं चुनाव न लड़ने का निर्णय लिया था।

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आजतक को दिए एक विशेष इंटरव्यू में प्रशांत किशोर ने कहा कि यदि उनकी पार्टी सहमति देती है तो वह बांकीपुर से चुनाव लड़ने के लिए तैयार हैं। उन्होंने इस उपचुनाव को सिर्फ एक सीट का चुनाव नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व की पहली बड़ी जन-परख बताया।

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प्रशांत किशोर का कहना है कि यह चुनाव सीधे तौर पर सरकार के कामकाज और नेतृत्व पर जनता की राय को सामने लाएगा। उन्होंने दावा किया कि बांकीपुर की जनता मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के कार्यकाल से असंतुष्ट है और 2025 के चुनाव में वहां का जनादेश असल में नीतीश कुमार के नाम पर दिया गया था, न कि वर्तमान नेतृत्व के पक्ष में।

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उन्होंने यह भी कहा, “अगर मेरे चुनाव लड़ने से भाजपा बांकीपुर जैसी मजबूत सीट हारती है, तो मैं चुनाव लड़ने को तैयार हूं।”

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पहले क्यों नहीं लड़ा चुनाव?

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2025 के विधानसभा चुनाव से पहले प्रशांत किशोर ने स्पष्ट किया था कि वह खुद मैदान में नहीं उतरेंगे, क्योंकि इससे जन सुराज के पूरे बिहार में चल रहे अभियान और उम्मीदवारों के प्रचार पर असर पड़ सकता है। इसी कारण उन्होंने किसी भी सीट से चुनाव नहीं लड़ा।

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उस समय उन्होंने यह भी संकेत दिया था कि भविष्य में यदि चुनाव लड़ना हुआ तो वह अपने गृह क्षेत्र करगहर से लड़ सकते हैं। बाद में राघोपुर सीट से तेजस्वी यादव के खिलाफ चुनाव लड़ने की चर्चा भी उठी, लेकिन वह भी आगे नहीं बढ़ी।

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बदलती रणनीति का संकेत

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अब बांकीपुर उपचुनाव में उतरने का फैसला उनकी बदली हुई राजनीतिक रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। चूंकि यह केवल एक सीट का उपचुनाव है, इसलिए प्रशांत किशोर इस मौके को अपनी राजनीतिक ताकत और जन स्वीकार्यता परखने के अवसर के रूप में देख रहे हैं।

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राजनीतिक महत्व

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अगर प्रशांत किशोर वास्तव में बांकीपुर से चुनाव लड़ते हैं, तो यह मुकाबला केवल भाजपा और जन सुराज के बीच सीमित नहीं रहेगा। यह चुनाव मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व की पहली बड़ी परीक्षा के साथ-साथ प्रशांत किशोर की व्यक्तिगत राजनीतिक पकड़ का भी अहम परीक्षण माना जाएगा।

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