मध्य पूर्व में जारी ईरान संघर्ष का असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था पर साफ दिखाई देने लगा है। यूरोपीय संघ (EU) ने चेतावनी दी है कि तेल और गैस की कीमतें 2027 के अंत तक ऊंची बनी रह सकती हैं। इससे यूरोप में महंगाई बढ़ने की आशंका है और आम लोगों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है।
यूरोपीय अधिकारियों के अनुसार, ऊर्जा कीमतों में लगातार बढ़ोतरी के कारण यूरोजोन में इस साल महंगाई दर लगभग 3.1 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। पहले यह अनुमान काफी कम लगाया गया था। विशेषज्ञों का मानना है कि ऊर्जा संकट का असर केवल ईंधन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि खाने-पीने की चीजों, परिवहन और रोजमर्रा की सेवाओं की कीमतों पर भी पड़ेगा।
यूरोपियन सेंट्रल बैंक की प्रमुख क्रिस्टीन लेगार्ड ने कहा कि यदि मध्य पूर्व का तनाव जल्द खत्म भी हो जाए, तब भी इसके आर्थिक प्रभाव लंबे समय तक बने रहेंगे। उन्होंने साफ किया कि बाजार में कीमतों का दबाव तुरंत कम नहीं होगा और महंगाई को नियंत्रित करने के लिए सख्त आर्थिक कदम उठाए जा सकते हैं।
यूरोपीय संघ ने यह भी कहा है कि फिलहाल उसके पास तेल का पर्याप्त भंडार मौजूद है, लेकिन समुद्री व्यापार मार्ग “स्ट्रेट ऑफ होर्मुज” में किसी भी तरह की रुकावट वैश्विक सप्लाई चेन को प्रभावित कर सकती है। दुनिया की बड़ी मात्रा में तेल और गैस इसी रास्ते से गुजरती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस संकट का असर भारत समेत कई देशों पर भी पड़ सकता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से पेट्रोल, डीजल और अन्य जरूरी वस्तुओं की कीमतों में उछाल आने की संभावना बनी हुई है।



