खराब थी दाहिनी किडनी, डॉक्टरों ने निकाल दी स्वस्थ बाईं किडनी; 12 साल बाद परिवार को मिला इंसाफ

Health May 23, 2026 By Praveen Sharma
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उत्तर प्रदेश में सामने आए मेडिकल लापरवाही के एक मामले ने इलाज व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक महिला की खराब दाहिनी किडनी निकालने के बजाय डॉक्टरों ने गलती से उसकी स्वस्थ बाईं किडनी निकाल दी। इस गंभीर चूक के बाद महिला की हालत लगातार बिगड़ती गई और करीब दो साल बाद उसकी मौत हो गई। अब राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने इस मामले को बेहद गंभीर मानते हुए परिवार को 2 करोड़ रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है।

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जानकारी के अनुसार, वर्ष 2012 में शांति देवी पेट दर्द की शिकायत लेकर डॉक्टर के पास पहुंची थीं। जांच में पता चला कि उनकी दाहिनी किडनी खराब है और उसे निकालने की जरूरत है। रिपोर्टों में साफ था कि बाईं किडनी पूरी तरह स्वस्थ है। परिवार को उम्मीद थी कि ऑपरेशन के बाद महिला की तबीयत ठीक हो जाएगी।

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6 मई 2012 को ऑपरेशन किया गया और डॉक्टरों ने दावा किया कि खराब किडनी निकाल दी गई है। लेकिन कुछ समय बाद भी महिला की हालत में सुधार नहीं हुआ। दोबारा जांच और सीटी स्कैन में सामने आया कि खराब दाहिनी किडनी अब भी शरीर में मौजूद है, जबकि स्वस्थ बाईं किडनी निकाल दी गई थी।

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सुनवाई के दौरान डॉक्टर की ओर से दिए गए बयान ने मामले को और गंभीर बना दिया। डॉक्टर ने स्वीकार किया कि दाहिनी तरफ चीरा लगाया गया था, लेकिन बाईं किडनी निकाल दी गई। आयोग ने इसे चिकित्सा क्षेत्र की गंभीर विफलता बताते हुए कहा कि ऐसा मामला बेहद दुर्लभ और चौंकाने वाला है।

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गलत ऑपरेशन के बाद महिला करीब दो वर्षों तक डायलिसिस पर रही। परिवार लगातार इलाज करवाता रहा, लेकिन 20 फरवरी 2014 को उसकी मौत हो गई। आयोग ने माना कि यदि स्वस्थ किडनी सुरक्षित रहती तो महिला की जान बच सकती थी।

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मामले की जांच उत्तर प्रदेश मेडिकल काउंसिल और मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया ने भी की थी। जांच में डॉक्टर को दोषी पाया गया और उसका पंजीकरण दो साल के लिए निलंबित कर दिया गया। सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि बचाव में फर्जी दस्तावेज पेश करने की कोशिश की गई थी।

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राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग की पीठ ने डॉक्टर को परिवार को कुल 2 करोड़ रुपये देने का आदेश दिया है। इसमें 1.5 करोड़ रुपये मेडिकल लापरवाही के मुआवजे के रूप में शामिल हैं। साथ ही परिवार के सदस्यों को मानसिक पीड़ा और पारिवारिक क्षति के लिए अलग-अलग मुआवजा देने का निर्देश भी दिया गया है। आयोग ने आदेश दिया है कि तय समय में भुगतान नहीं होने पर ब्याज भी देना होगा।

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