देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी के बाद आम लोगों को आने वाले महीनों में और महंगाई का सामना करना पड़ सकता है। ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों का कहना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहीं, तो अगले तीन से चार महीनों में ईंधन के दाम फिर बढ़ सकते हैं।
हाल ही में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में करीब 3 रुपये प्रति लीटर का इजाफा किया गया था। बताया जा रहा है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और तेल आपूर्ति को लेकर बढ़ती चिंताओं के कारण कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी बनी हुई है। ब्रेंट कच्चा तेल 110 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच चुका है, जिससे तेल कंपनियों पर भारी दबाव बढ़ गया है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर कच्चा तेल लंबे समय तक 90 से 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना रहता है, तो तेल कंपनियों के नुकसान की भरपाई के लिए ईंधन की कीमतों में और बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है। उनका मानना है कि मौजूदा बढ़ोतरी से कंपनियों को केवल आंशिक राहत मिली है।

ऊर्जा विश्लेषकों का कहना है कि भारत अपनी जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। ऐसे में वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में होने वाला उतार-चढ़ाव सीधे घरेलू ईंधन कीमतों को प्रभावित करता है।
विशेषज्ञों ने यह भी चेतावनी दी है कि पेट्रोल और डीजल महंगे होने का असर सिर्फ वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहेगा। परिवहन लागत बढ़ने से खाने-पीने की चीजों, रोजमर्रा के सामान और अन्य सेवाओं की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है, जिससे महंगाई और बढ़ने की आशंका है।
हालांकि, जानकारों का मानना है कि यदि सरकार समय रहते हस्तक्षेप करती है या अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आती है, तो लोगों को कुछ राहत मिल सकती है।
