दुनिया अभी पूरी तरह कोरोना जैसी महामारी से उबर भी नहीं पाई थी कि अब एक और खतरनाक संक्रामक बीमारी ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। हाल ही में सामने आई रिपोर्ट के मुताबिक, ऑस्ट्रेलिया में करीब 50 साल बाद डिप्थीरिया का प्रकोप देखने को मिला है।

यह खबर सिर्फ एक देश तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया के लिए चेतावनी बनकर सामने आई है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर समय रहते सावधानी नहीं बरती गई, तो यह बीमारी फिर से तेजी से फैल सकती है।

रिपोर्ट के अनुसार, ऑस्ट्रेलिया के नॉर्दर्न टेरिटरी और वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया जैसे इलाकों में डिप्थीरिया के कई मामले सामने आए हैं। पिछले कुछ महीनों में इसके केस लगातार बढ़े हैं, जिससे स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड पर आ गया है।

बताया जा रहा है कि मार्च से लेकर अब तक सांस से जुड़े डिप्थीरिया के कई मामले दर्ज किए गए हैं, जबकि त्वचा से जुड़े संक्रमण के भी कई केस सामने आए हैं। मरीजों की उम्र छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक है, जिससे यह साफ हो जाता है कि यह बीमारी किसी भी उम्र के व्यक्ति को प्रभावित कर सकती है।
डिप्थीरिया एक गंभीर बैक्टीरियल संक्रमण है, जो मुख्य रूप से गले और सांस की नली को प्रभावित करता है। इसके शुरुआती लक्षण आम सर्दी-खांसी जैसे होते हैं, लेकिन जैसे-जैसे यह बढ़ता है, गले में एक मोटी परत बन जाती है, जिससे सांस लेना और निगलना मुश्किल हो जाता है।
अगर समय पर इलाज न मिले, तो यह संक्रमण दिल, नसों और अन्य अंगों को भी प्रभावित कर सकता है। गंभीर मामलों में यह जानलेवा भी साबित हो सकता है।
इस बीमारी के फैलने का तरीका भी बेहद खतरनाक है। संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने या उसके संपर्क में आने से यह तेजी से फैल सकती है। खासतौर पर भीड़भाड़ वाले इलाकों और कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों में इसका खतरा ज्यादा होता है।
सबसे चिंता की बात यह है कि कोविड महामारी के बाद कई देशों में टीकाकरण की रफ्तार धीमी हो गई थी। इसी वजह से अब ऐसी पुरानी बीमारियां फिर से सिर उठा रही हैं। विशेषज्ञों का साफ कहना है कि अगर वैक्सीनेशन को नजरअंदाज किया गया, तो हालात और गंभीर हो सकते हैं।
डिप्थीरिया से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका टीकाकरण है। डीपीटी वैक्सीन इस बीमारी से सुरक्षा प्रदान करती है और बच्चों को समय पर यह टीका लगवाना बेहद जरूरी है।
इसके अलावा, अगर किसी व्यक्ति में गले में खराश, बुखार, सांस लेने में दिक्कत या गले में परत बनने जैसे लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
अभी भले ही यह प्रकोप ऑस्ट्रेलिया में देखा गया हो, लेकिन विशेषज्ञों ने भारत समेत अन्य देशों को भी सतर्क रहने की सलाह दी है।