चुनाव आयोग ने असम, केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी और पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों की घोषणा के साथ ही आदर्श आचार संहिता (एमसीसी) को तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया है। आयोग ने इसके सख्त पालन के निर्देश जारी करते हुए निगरानी व्यवस्था को भी मजबूत कर दिया है।

आयोग के अनुसार, चुनावी राज्यों में 5,173 से अधिक उड़न दस्ते और 5,200 से अधिक स्थिर निगरानी टीमें (SST) तैनात की गई हैं, ताकि किसी भी शिकायत का समाधान 100 मिनट के भीतर किया जा सके। इसके अलावा जिला स्तर पर 24 घंटे कंट्रोल रूम सक्रिय करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

चुनाव आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि एमसीसी लागू होने के बाद केंद्र और राज्य सरकारें कोई नई योजना, परियोजना या नीतिगत घोषणा नहीं कर सकतीं। साथ ही विधायक और सांसद निधि (MLA/MP Fund) जारी करने पर भी रोक लगा दी गई है।

अधिकारियों को दिए गए निर्देशों में सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग पर सख्त रोक, सार्वजनिक और निजी संपत्तियों को नुकसान से बचाना, सरकारी विज्ञापनों पर रोक और सरकारी वेबसाइटों से राजनीतिक पदाधिकारियों की तस्वीरें हटाना शामिल है। मंत्रियों को अपनी आधिकारिक यात्राओं को चुनाव प्रचार से अलग रखने के लिए भी कहा गया है।
राजनीतिक दलों को निर्देश दिया गया है कि वे अपनी रैलियों और जुलूसों की पूर्व सूचना प्रशासन को दें, तय मार्ग और समय का पालन करें तथा कानून-व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करें।
📌 क्या है आदर्श आचार संहिता (MCC)?
आदर्श आचार संहिता चुनाव आयोग द्वारा जारी नियमों का एक सेट है, जिसका पालन सभी राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों को चुनाव के दौरान करना होता है। इसका उद्देश्य निष्पक्ष, स्वतंत्र और शांतिपूर्ण चुनाव सुनिश्चित करना है। यह चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के साथ ही लागू हो जाती है और परिणाम आने तक प्रभावी रहती है।
⚖️ MCC लागू होने के बाद क्या-क्या बदलता है?
धर्म, जाति या समुदाय के आधार पर वोट मांगना प्रतिबंधित
विरोधियों पर व्यक्तिगत हमले नहीं, केवल नीतियों पर आलोचना
सरकारी मीडिया का पक्षपातपूर्ण उपयोग वर्जित
मतदान केंद्रों के पास प्रचार, भीड़ या प्रलोभन देना प्रतिबंधित
बिना अनुमति जुलूस, लाउडस्पीकर और सभाएं नहीं
सरकारी मशीनरी, धन या पद का चुनाव में उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित
नई योजनाओं, परियोजनाओं या वित्तीय घोषणाओं पर रोक