नई दिल्ली। भारत और अमेरिका की सेनाओं के बीच चल रहा संयुक्त सैन्य अभ्यास सामरिक दृष्टि से चर्चा में है। पेज पर प्रकाशित खबर के अनुसार यह अभ्यास चीन सीमा के नजदीकी क्षेत्र में आयोजित किया जा रहा है, जहां दोनों देशों के सैनिक कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में अपनी युद्ध क्षमता और आपसी समन्वय का अभ्यास कर रहे हैं।

इस प्रकार के संयुक्त सैन्य अभ्यास का उद्देश्य सैनिकों को एक-दूसरे की कार्यप्रणाली, रणनीति और उपकरणों से परिचित कराना होता है। ऊंचाई वाले इलाकों में सैन्य अभियान सामान्य मैदानी क्षेत्रों से काफी अलग होते हैं। कम ऑक्सीजन, कठिन मौसम और दुर्गम भूभाग सैनिकों तथा सैन्य उपकरणों दोनों के लिए चुनौती पैदा करते हैं।
अभ्यास में युद्ध परिस्थितियों से संबंधित विभिन्न गतिविधियों और संयुक्त ऑपरेशनों का प्रशिक्षण शामिल है। इससे दोनों सेनाओं के बीच interoperability यानी जरूरत पड़ने पर साथ मिलकर प्रभावी तरीके से काम करने की क्षमता को बेहतर करने में मदद मिलती है।
भारत और अमेरिका पिछले कई वर्षों से रक्षा क्षेत्र में सहयोग बढ़ा रहे हैं। दोनों देशों की सेनाएं नियमित रूप से अलग-अलग सैन्य अभ्यासों में भाग लेती हैं। हालांकि चीन सीमा के निकट होने के कारण इस अभ्यास की भौगोलिक स्थिति पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
संयुक्त सैन्य अभ्यासों को किसी वास्तविक युद्ध कार्रवाई से अलग समझना जरूरी है। इनका घोषित उद्देश्य प्रशिक्षण, अनुभव साझा करना और सैन्य समन्वय बढ़ाना होता है। मौजूदा अभ्यास भी कठिन परिस्थितियों में दोनों सेनाओं की परिचालन क्षमता को परखने और बेहतर करने पर केंद्रित है।





