कवि और वक्ता कुमार विश्वास ने फिल्म ‘स्त्री’ के एक सीन को लेकर नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने सार्वजनिक मंच से फिल्म में दिखाए गए एक दृश्य का जिक्र करते हुए सवाल उठाया कि मनोरंजन के नाम पर फिल्मों में किस तरह की सामग्री दिखाई जा रही है।

कुमार विश्वास ने कहा कि फिल्मों और लोकप्रिय संस्कृति का समाज, खासकर युवा दर्शकों पर प्रभाव पड़ता है। ऐसे में फिल्म निर्माताओं को यह भी सोचना चाहिए कि किसी दृश्य, संवाद या मजाक का दर्शकों पर क्या असर पड़ सकता है।
‘स्त्री’ हिंदी सिनेमा की लोकप्रिय हॉरर-कॉमेडी फिल्मों में शामिल है। फिल्म ने डर और कॉमेडी को मिलाकर दर्शकों के बीच अलग पहचान बनाई थी। इसकी सफलता के बाद इससे जुड़े सिनेमाई यूनिवर्स को भी आगे बढ़ाया गया।
हालांकि कुमार विश्वास की आपत्ति फिल्म के एक खास दृश्य को लेकर है। उनका कहना है कि कॉमेडी या मनोरंजन के लिए ऐसी चीजों को सामान्य बनाना सही नहीं माना जाना चाहिए, जिन पर सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से सवाल उठते हों।
उनकी टिप्पणी सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोग उनकी बात से सहमत हैं और फिल्मों में कंटेंट की जिम्मेदारी की बात कर रहे हैं। वहीं कुछ दर्शकों का मानना है कि फिल्मों के काल्पनिक दृश्यों और हास्य को उसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
यह बहस केवल एक फिल्म तक सीमित नहीं है। OTT और डिजिटल प्लेटफॉर्म के दौर में फिल्मों और वेब सीरीज के कंटेंट को लेकर ऐसी चर्चाएं लगातार बढ़ी हैं।
कुमार विश्वास की टिप्पणी ने एक बार फिर वही पुराना सवाल सामने ला दिया है—मनोरंजन की आजादी और सामाजिक जिम्मेदारी के बीच सीमा आखिर कहां तय होनी चाहिए?



