दिग्गज पटकथा लेखक सलीम खान को हिंदी सिनेमा में उनके लंबे और प्रभावशाली योगदान के लिए राज कपूर लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है। महाराष्ट्र राज्य फिल्म पुरस्कार समारोह में उन्हें यह प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान किया गया।
सलीम खान हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के उस दौर का अहम हिस्सा रहे हैं जब कहानी और पटकथा ने भारतीय कमर्शियल सिनेमा की दिशा बदलनी शुरू की थी। सलीम-जावेद की जोड़ी ने 1970 और 80 के दशक में कई ऐसी फिल्में लिखीं जो बाद में हिंदी सिनेमा की पहचान बन गईं।
‘शोले’, ‘दीवार’, ‘जंजीर’ और ‘डॉन’ जैसी फिल्मों की पटकथा और संवादों ने न केवल बॉक्स ऑफिस पर सफलता हासिल की, बल्कि भारतीय सिनेमा में ‘एंग्री यंग मैन’ जैसे नए नायक की छवि को भी लोकप्रिय बनाया।

समारोह के दौरान सलीम खान के दशकों लंबे फिल्मी सफर और लेखन में उनके योगदान को याद किया गया। उम्र के इस पड़ाव पर मिला लाइफटाइम अचीवमेंट सम्मान उनके करियर की एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि बन गया है।
सलीम खान का प्रभाव केवल उनके दौर की फिल्मों तक सीमित नहीं रहा। उनकी लिखी कहानियां और किरदार आज भी फिल्म लेखन की चर्चा में उदाहरण के तौर पर सामने आते हैं।

उनके बेटे सलमान खान, अरबाज खान और सोहेल खान भी मनोरंजन जगत से जुड़े हैं, लेकिन बतौर लेखक सलीम खान की अपनी अलग विरासत रही है।

राज कपूर के नाम पर दिया जाने वाला यह सम्मान महाराष्ट्र सरकार के प्रमुख फिल्म सम्मानों में शामिल है। सलीम खान को यह पुरस्कार मिलना हिंदी सिनेमा के उस लेखन युग को भी सम्मान है जिसने भारतीय फिल्मों की कहानी कहने की शैली को बदल दिया।

