भारत और चीन के बीच लंबे समय से जारी सीमा तनाव के बावजूद दोनों देशों के संबंधों को लेकर पूर्व राजदूत गौतम बंबावले का अहम बयान सामने आया है। इंडिया टुडे के एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि चीन के साथ काम करना भारत के लिए जरूरी है और दोनों देशों के रिश्तों को केवल सीमा विवाद के नजरिए से नहीं देखा जा सकता।
भारत और चीन एशिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाएं हैं। दोनों के बीच राजनीतिक मतभेद होने के बावजूद व्यापारिक संबंध काफी बड़े हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी, औद्योगिक उपकरण और कई अन्य क्षेत्रों में भारतीय बाजार की सप्लाई चेन चीन से जुड़ी हुई है।
बंबावले के मुताबिक भारत को अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देते हुए चीन के साथ व्यावहारिक संबंध बनाए रखने होंगे। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि सीमा सुरक्षा या रणनीतिक चिंताओं को नजरअंदाज किया जाए।
2020 में गलवान घाटी की घटना के बाद दोनों देशों के संबंधों में गंभीर तनाव आया था। इसके बाद सीमा पर सैन्य तैनाती, बातचीत और डिसएंगेजमेंट को लेकर कई दौर की चर्चा हुई। इसके बावजूद दोनों देशों के बीच व्यापार पूरी तरह खत्म नहीं हुआ।

अब BRICS जैसे बहुपक्षीय मंच भी भारत और चीन को एक साथ बातचीत का अवसर देते हैं। यही कारण है कि रिश्तों में प्रतिस्पर्धा और सहयोग दोनों साथ-साथ दिखाई देते हैं।
भारत के सामने चुनौती यह है कि वह चीन पर महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अत्यधिक निर्भरता कम करे, लेकिन साथ ही दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के साथ आर्थिक अवसरों को पूरी तरह बंद भी न करे।
ऐसे में आने वाले वर्षों में भारत-चीन संबंधों का आधार शायद दोस्ती या टकराव की एकतरफा नीति नहीं, बल्कि राष्ट्रीय हितों पर आधारित रणनीतिक संतुलन होगा।


