उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में साहिबाबाद पुलिस ने एटीएम और कैश डिपॉजिट मशीन (CDM) से लाखों रुपये की ठगी करने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। उनके कब्जे से ₹4 लाख नकद, अपराध की रकम से खरीदी गई एक स्कॉर्पियो, वारदात में इस्तेमाल की गई एक सेंट्रो कार, स्मार्ट प्लग, मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए गए हैं।
प्रारंभिक जांच में पता चला है कि यह गिरोह दिल्ली, हरियाणा, महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में इसी तरीके से वारदातों को अंजाम दे चुका है।

बैंक की शिकायत के बाद शुरू हुई जांच
पुलिस के अनुसार, केनरा बैंक की राजेंद्र नगर शाखा की शाखा प्रबंधक छवि ऐरन ने शिकायत दर्ज कराई थी कि 27 से 29 जून के बीच बैंक की कैश डिपॉजिट मशीन से छेड़छाड़ कर अज्ञात लोगों ने नकदी निकाल ली। शिकायत के आधार पर साहिबाबाद थाने में मामला दर्ज किया गया और जांच के लिए विशेष टीमों का गठन किया गया।
सीसीटीवी फुटेज, स्थानीय खुफिया जानकारी और मुखबिर की सूचना के आधार पर पुलिस ने आरोपियों की पहचान की। इसके बाद 21 और 22 जुलाई की रात साहिबाबाद रेलवे स्टेशन के पास स्थित अंडरपास से चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अहसान, सिराज, आरिफ और रहीश के रूप में हुई है।
स्मार्ट प्लग से रोकते थे मशीन की बिजली
पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया कि वे वारदात से पहले एटीएम और कैश डिपॉजिट मशीन की बिजली आपूर्ति में गुपचुप तरीके से स्मार्ट प्लग लगा देते थे। इस प्लग को मोबाइल में मौजूद Smart Life App के जरिए नियंत्रित किया जाता था।
जैसे ही कोई ग्राहक मशीन में नकदी जमा करता या निकासी की प्रक्रिया शुरू करता, आरोपी मोबाइल से बिजली की आपूर्ति बंद कर देते थे। इससे मशीन की प्रक्रिया बीच में रुक जाती और नकदी मशीन के अंदर ट्रे या ऊपरी हिस्से में फंस जाती थी।

ग्राहक के जाने के बाद निकालते थे नकदी
पुलिस के मुताबिक, ग्राहक के वहां से चले जाने के बाद आरोपी पेचकस और विशेष रूप से तैयार किए गए लोहे के औजारों की मदद से मशीन खोलते और उसमें फंसी नकदी निकाल लेते थे। पूरी वारदात को इस तरह अंजाम दिया जाता था कि शुरुआती दौर में किसी को संदेह भी नहीं होता था।

छुट्टी के दिन बनाते थे निशाना
जांच में सामने आया कि गिरोह अधिकतर बैंक खुलने से पहले या छुट्टी वाले दिनों में वारदात करता था, ताकि बैंक कर्मचारियों और ग्राहकों को तुरंत भनक न लगे। गिरोह के दो सदस्य मशीन से छेड़छाड़ करते थे, जबकि बाकी दो आसपास निगरानी रखकर पुलिस और अन्य लोगों की गतिविधियों पर नजर रखते थे।
कई राज्यों में वारदात कबूल
पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने पूछताछ में राजेंद्र नगर स्थित केनरा बैंक और पंजाब नेशनल बैंक की कैश डिपॉजिट मशीनों को इसी तकनीक से निशाना बनाने की बात स्वीकार की है। साथ ही उन्होंने दिल्ली, हरियाणा और महाराष्ट्र सहित कई राज्यों में इसी तरह की वारदातों को अंजाम देने की भी जानकारी दी है।

फोरेंसिक जांच से खुल सकते हैं और राज
पुलिस अब आरोपियों के पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है। बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फोरेंसिक जांच कर यह पता लगाया जाएगा कि गिरोह ने अब तक कितनी मशीनों को निशाना बनाया और कुल कितनी रकम की ठगी की। अधिकारियों का कहना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ इस अंतरराज्यीय साइबर गिरोह से जुड़े कई और अहम खुलासे होने की संभावना है।