25 जुलाई से शुरू होगा चातुर्मास, चार माह तक रहेंगे भगवान विष्णु योगनिद्रा में, मांगलिक कार्यों पर लगेगी रोक

Religious June 23, 2026 By Santosh Pandit
News Image

हिंदू धर्म में चातुर्मास का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना जाता है। यह चार महीनों का पवित्र काल भगवान विष्णु को समर्पित होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवशयनी एकादशी से भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं और चार महीने बाद देवउठनी एकादशी पर जागते हैं। इसी अवधि को चातुर्मास कहा जाता है।

Advertisement

द्रिक पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में देवशयनी एकादशी 25 जुलाई को मनाई जाएगी। इसी दिन से चातुर्मास का शुभारंभ होगा, जो 20 नवंबर को देवउठनी एकादशी के साथ समाप्त होगा। इस दौरान श्रावण, भाद्रपद, आश्विन और कार्तिक मास का समावेश होगा।

Advertisement

धार्मिक मान्यता है कि देवशयनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु क्षीरसागर में योगनिद्रा में चले जाते हैं। उनके विश्राम काल के दौरान विवाह, गृह प्रवेश, उपनयन संस्कार, यज्ञ और अन्य मांगलिक कार्य नहीं किए जाते। देवउठनी एकादशी पर भगवान के जागने के बाद पुनः सभी शुभ और मांगलिक कार्यों की शुरुआत होती है।

Advertisement

राजा बलि और वामन अवतार से जुड़ी है चातुर्मास की कथा

Advertisement

पौराणिक कथाओं के अनुसार, चातुर्मास का संबंध असुरराज राजा बलि और भगवान विष्णु के वामन अवतार से है। कहा जाता है कि राजा बलि ने अपने पराक्रम से स्वर्ग सहित तीनों लोकों पर अधिकार कर लिया था। देवताओं की प्रार्थना पर भगवान विष्णु ने वामन अवतार धारण किया और राजा बलि से तीन पग भूमि दान में मांगी।

Advertisement

राजा बलि के सहमत होने पर भगवान विष्णु ने विराट रूप धारण कर लिया। पहले पग में पृथ्वी, दूसरे में आकाश नाप लिया। तीसरे पग के लिए स्थान न बचने पर राजा बलि ने अपना सिर अर्पित कर दिया। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उन्हें वरदान दिया और उनके द्वार पर निवास करने का वचन दिया।

Advertisement

मान्यता है कि चातुर्मास के दौरान भगवान विष्णु राजा बलि के द्वार पर ही रहते हैं और कार्तिक शुक्ल एकादशी के दिन पुनः अपने धाम लौटते हैं।

Advertisement

क्यों महत्वपूर्ण है चातुर्मास?

Advertisement

शास्त्रों के अनुसार, जब देवता विश्राम करते हैं, तब नकारात्मक शक्तियां अधिक सक्रिय हो जाती हैं। इसलिए इन चार महीनों में साधना, भक्ति, संयम और आत्मअनुशासन का विशेष महत्व बताया गया है। चातुर्मास को आध्यात्मिक उन्नति और आत्मशुद्धि का श्रेष्ठ समय माना जाता है।

Advertisement

इस अवधि में विवाह, गृह प्रवेश और अन्य शुभ कार्यों पर रोक रहती है, लेकिन पूजा-पाठ, कथा, जप, तप, दान और धार्मिक अनुष्ठान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। सत्यनारायण कथा, रुद्राभिषेक, विष्णु पूजा और भागवत श्रवण जैसे कार्य विशेष फलदायी माने जाते हैं।

Advertisement

चातुर्मास में खान-पान के नियम

Advertisement

चातुर्मास के दौरान सात्विक जीवनशैली अपनाने और कुछ विशेष खाद्य पदार्थों का त्याग करने की परंपरा है। कई श्रद्धालु इस दौरान गुड़, तेल, बैंगन, प्याज, लहसुन तथा तामसिक भोजन का सेवन नहीं करते।

Advertisement

महीनों के अनुसार भी कुछ विशेष परहेज बताए गए हैं—

Advertisement

श्रावण मास में पालक और हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन नहीं किया जाता।

Advertisement

भाद्रपद मास में दही का त्याग किया जाता है।

Advertisement

आश्विन मास में दूध पीने से परहेज किया जाता है।

Advertisement

कार्तिक मास में मांसाहार, विशेषकर मछली का सेवन वर्जित माना जाता है।

Advertisement

घर पर कैसे करें चातुर्मास का पालन?

धार्मिक विद्वानों के अनुसार, चातुर्मास का पालन करने के लिए किसी विशेष स्थान पर जाने की आवश्यकता नहीं है। श्रद्धालु अपने घर पर भी सरलता से इसका पालन कर सकते हैं।

प्रतिदिन सूर्योदय से पहले उठकर भगवान विष्णु की पूजा करें।

भगवान को दीपक जलाकर तुलसी दल अर्पित करें।

विष्णु सहस्रनाम या हरे कृष्ण महामंत्र का जाप करें।

चार महीनों में कम से कम एकादशी व्रत अवश्य रखें।

किसी एक प्रिय वस्तु या आदत का त्याग कर व्यक्तिगत व्रत का संकल्प लें।

श्रीमद्भागवत, रामायण या अन्य धार्मिक ग्रंथों का पाठ एवं श्रवण करें।

अन्नदान, गौसेवा, गरीबों की सहायता और मंदिर सेवा जैसे पुण्य कार्य करें।

धार्मिक मान्यता है कि चातुर्मास में श्रद्धा और नियमपूर्वक की गई पूजा-अर्चना से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है तथा जीवन में सुख, शांति और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है।

AdvertisementAdvertisementAdvertisementAdvertisementAdvertisementAdvertisementAdvertisementAdvertisementAdvertisementAdvertisementAdvertisementAdvertisementAdvertisementAdvertisementAdvertisementAdvertisementAdvertisement

Related News

News image
Religious
वास्तु के 4 आसान उपाय, जो बढ़ा सकते हैं धन और समृद्धि का प्रवाह

जीवन में आर्थिक परेशानियां, धन की कमी और लगातार आ रही बाधाओं के पीछे कई बार वास्तु दोष को भी जिम्मेदार माना जाता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार घर और...

News image
Religious
गुरुग्राम में 25 जून को होगा भव्य सूर्य गायत्री महायज्ञ, गायत्री जयंती पर जुटेंगे श्रद्धालु

गुरुग्राम में गायत्री जयंती के पावन अवसर पर एक भव्य आध्यात्मिक आयोजन होने जा रहा है। परम शक्ति पीठ पीतांबरा सूर्य नारायण मंदिर में 25 जून को सूर्य ...

News image
Religious
राहु-केतु के महागोचर से 5 राशियों की चमकेगी किस्मत, करियर और धन में मिल सकता है बड़ा लाभ

मेष राशिः राहु आपकी राशि से 10वें भाव (कर्म भाव) में गोचर करेंगे. ज्योतिष में 10वें भाव का राहु बेहद शक्तिशाली और शुभ माना जाता है. कार्यक्षेत्र म...

News image
Religious
मंगल के वृषभ राशि में गोचर से बनेगा रुचक राजयोग, इन 4 राशियों के खुल सकते हैं भाग्य

जून 2026 के अंतिम सप्ताह में ग्रहों की चाल में एक बड़ा परिवर्तन होने जा रहा है, जिसका असर सभी 12 राशियों पर देखने को मिलेगा। ज्योतिष शास्त्र के अनु...

News image
Religious
15 जून से सूर्य का मिथुन राशि में गोचर, 4 राशियों के लिए खुलेंगे तरक्की के रास्ते

वैदिक ज्योतिष में सूर्य को ग्रहों का राजा माना जाता है और इसका राशि परिवर्तन जीवन के कई क्षेत्रों पर गहरा प्रभाव डालता है। पंचांग के अनुसार, 15 जून...

News image
Religious
साल का आखिरी सूर्य ग्रहण 12 अगस्त को, जानें किन राशियों पर पड़ेगा असर

सूर्य ग्रहण खगोलीय दृष्टि से एक महत्वपूर्ण घटना मानी जाती है, जब चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच आ जाता है और कुछ समय के लिए सूर्य की रोशनी पृथ्वी त...